अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयातित सौर सेल और पैनलों पर प्रारंभिक एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई है। इस घोषणा के बाद भारतीय सौर ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) लगातार अपने फैसलों और बयानों से दुनिया के देशों व बाजारों को डराते आए हैं। एक बार फिर उन्होंने टैरिफ से हटकर एंटी डंपिंग ड्यूटी (Antidumping Duties) लगाकर भारत समेत 3 अन्य देशों को चौंकाया है। दरअसल, अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयातित सौर सेल और पैनलों पर प्रारंभिक एंटी-डंपिंग ड्यूटी की घोषणा की गई है। इसके बाद, 24 अप्रैल को सौर सेल सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट आ गई। वारी एनर्जीज के शेयरों में 4% तक गिर गए, वहीं विक्रम सोलर के शेयरों में भी 2% की गिरावट आई।
क्यों लगाई एंटी डंपिंग ड्यूटी?
इस फैसले के साथ, संघीय व्यापार अधिकारियों ने घरेलू सौर ऊर्जा संयंत्र मालिकों का समर्थन करते हुए पाया कि तीनों देशों में कार्यरत कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में सस्ते उत्पाद बेचे। वाणिज्य विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित एक फैक्ट शीट के अनुसार, एजेंसी ने भारत से आयात पर 123.04%, इंडोनेशिया से आयात पर 35.17% और लाओस से आयात पर 22.46% की प्रारंभिक शुल्क दरें (डंपिंग मार्जिन के रूप में जानी जाती हैं) निर्धारित की हैं। सरकारी व्यापार आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष इन तीन देशों ने अमेरिका से 4.5 अरब डॉलर के सौर ऊर्जा आयात किए, जो कुल आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा था।
वाणिज्य विभाग ने कहा कि वह भारत और इंडोनेशिया से आयातित सौर सेल पर अंतिम निर्णय 13 जुलाई या उसके आसपास और लाओस से आयात पर निर्णय 9 सितंबर या उसके आसपास घोषित करेगा।
यह निर्णय इन देशों के उत्पादकों के लिए एक बड़ा झटका है, जो तेजी से बढ़ते अमेरिकी बाजार को सामान की आपूर्ति कर रहे थे। याचिका दायर करने वाले एलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड में एरिज़ोना के टेम्पे स्थित फर्स्ट सोलर, कोरिया की हनवा की सौर ऊर्जा प्रभाग क्यूसेल्स और निजी कंपनियां टैलन पीवी और मिशन सोलर शामिल हैं।





