लोक अदालत केवल मुकदमे खत्म नहीं करती, रिश्तों को भी जोड़ती है” — न्यायिक अधिकारी
कानपुर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशन में आज 9 मई 2026 को जनपद न्यायालय परिसर, कानपुर नगर में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष लोक अदालत में पारिवारिक विवादों, मोटर व्हीकल अधिनियम से संबंधित चालानों एवं अन्य शमनीय प्रकृति के मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण पर विशेष बल दिया जाएगा।
जिला न्यायालय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों के कारण आमजन को आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय लोक अदालत ऐसे मामलों के शीघ्र, सरल एवं कम खर्चीले समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। इस बार लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अपर जिला जज/मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी संजय वर्मा ने कहा कि मोटर दुर्घटना प्रतिकर व चालानी मामलों में लोक अदालत अत्यंत प्रभावी मंच साबित हो रही है। इससे पक्षकारों को वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और आपसी सहमति से त्वरित राहत मिल जाती है। उन्होंने आमजन से अधिक से अधिक संख्या में लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील की।
अपर जिला जज निशा श्रीवास्तव ने कहा कि पारिवारिक मुकदमों में न्यायालय का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि परिवारों को टूटने से बचाना भी है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के विवाद, भरण-पोषण, बच्चों के संरक्षण एवं वैवाहिक मतभेदों के मामलों में लोक अदालत संवेदनशील वातावरण प्रदान करती है, जहां दोनों पक्षों की सहमति एवं संवाद से समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है।
अपर जिला जज देवकांत शुक्ला ने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम से बैंक वसूली, किराएदारी विवाद, चेक बाउंस, मोबाइल एवं केबल संबंधी विवाद, वाणिज्य कर, राजस्व, श्रम वाद एवं अन्य दीवानी प्रकृति के मामलों का भी प्रभावी निस्तारण किया जाता है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का भार कम होता है तथा आमजन को शीघ्र न्याय प्राप्त होता है।
अपर जिला जज सुभाष सिंह ने कहा कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था की एक मानवीय एवं व्यवहारिक पहल है, जहां तकनीकी जटिलताओं से अधिक आपसी सहमति और सौहार्द को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम होता है तथा उसके विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे पक्षकारों को तत्काल राहत प्राप्त होती है।
अपर जिला जज दीपाली सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि आपसी समझौते से विवाद समाप्त होने पर परिवारों एवं समाज में सकारात्मक संदेश जाता है तथा सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।
राष्ट्रीय लोक अदालत की नोडल अधिकारी एवं अपर जिला जज रश्मि सिंह ने बताया कि लोक अदालत का मूल उद्देश्य आमजन को सुलभ, त्वरित एवं किफायती न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस विशेष लोक अदालत में पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, बैंक ऋण वसूली, चेक बाउंस, राजस्व, चकबंदी, श्रम, आयकर, विद्युत, जलकर एवं सभी शमनीय फौजदारी मामलों का निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि वे अपने लंबित मामलों के निस्तारण हेतु संबंधित पक्षों के साथ लोक अदालत में उपस्थित होकर इसका लाभ उठाएं।
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत 9 मई को प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक जनपद न्यायालय परिसर, कानपुर नगर में आयोजित होगी, जिसमें न्यायिक अधिकारियों के साथ अधिवक्तागण एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अभिनव तिवारी सहित न्यायिक अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।





