उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं के पलायन के लिए घाटी के आम लोग जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने श्रीनगर में ‘ऋषिवर’ अंतरधार्मिक सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर को धार्मिक सौहार्द का प्रतीक बताया।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं के पलायन के लिए घाटी के आम लोगों को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर सदियों से धार्मिक सौहार्द, सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक बहुलता का प्रतीक रहा है।
आज यहां श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कान्फ्रेंस सेंटर में आयोजित ‘ऋषिवर’ अंतरधार्मिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विभिन्न धर्मों और परंपराओं के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का एक मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा ऐसी सभ्यतागत विरासत पर आधारित है, जो सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को महत्व देती है।
सिन्हा ने कहा कि मानवता तभी आगे बढ़ती है जब समाज के विभिन्न वर्ग साझा लक्ष्यों और सामूहिक जिम्मेदारी के साथ मिलकर कार्य करते हैं। उन्होंने सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान को भारत की मानवता के लिए सबसे मूल्यवान देन बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए इस भावना को संरक्षित रखना आवश्यक है।
समकालीन शासन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि नागरिक भले ही अलग-अलग धर्मों और परंपराओं का पालन करते हों, लेकिन भारत का संविधान सभी के लिए समान मार्गदर्शक है। कश्मीरी हिंदुओं के पलायन के मुद्दे पर बोलते हुए सिन्हा ने कहा कि उस दौर में जो घटनाएं हुईं, उनके लिए घाटी के आम निवासी जिम्मेदार नहीं थे। उन्होंने कश्मीर की ऐतिहासिक सह-अस्तित्व की परंपरा का उल्लेख करते हुए विभिन्न समुदायों के बीच सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
उपराज्यपाल ने देशभक्ति गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जम्मू-कश्मीर के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि भारत की कुल आबादी का लगभग एक प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के तीनों चरणों में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहला स्थान हासिल किया।





