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लखनऊ: ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स एक्ट’ की अनदेखी से गई श्रमिक लालाराम की जान, सिर्फ कागजों में सिमटे शासनादेश

लखनऊ में एक श्रमिक की भूमिगत नाले में दम घुटने से मौत हो गई, जिसका कारण ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स एक्ट-2013’ का पालन न होना बताया गया है। बार-बार शासनादेश जारी होने के बावजूद, सुरक्षा उपायों की अनदेखी से ऐसे हादसे लगातार हो रहे हैं।

लखनऊ। ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स एक्ट’ (एमएस एक्ट-2013) का राजधानी में पालन हो रहा होता तो शुक्रवार को चिनहट क्षेत्र में भूमिगत नाले में उतरे श्रमिक की दम घुटने से मौत न होती।

प्रमुख सचिव स्तर से एमएस एक्ट का पालन कराने को चारा बार शासनादेश जारी किया, लेकिन उसका आज तक अनुपालन नहीं हो सका।

स्थानीय निकाय निदेशालय की तत्कान निदेशक नेहा शर्मा ने 16 मार्च 2023 को पत्र लिखकर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव को बताया था कि एमएस एक्ट के पालन को सभी नगर निकायों को निAIर्देश देते हुए सुरक्षा मुहैया कराने को कहा है।

अफसरों के लिए यह कागज का टुकड़ा था, लेकिन अनुपालन न होने से ‘मौत के कुएं’ में उतरने वाले श्रमिकों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। शुक्रवार शाम को लालाराम की मौत के बाद अधिकारियों ने ठेकेदार फर्म को ब्लैक लिस्ट और पुलिस को तहरीर देकर शांत बैठ गए।

मैनहोल या भूमिगत नाले की सफाई के दौरान श्रमिकों की मौत सिर्फ लखनऊ ही नहीं, देश के कई हिस्सों मे होती रहती हैं, लेकिन जिम्मेदारों को एमएस एक्ट का अनुपालन कराने की याद नहीं आती है। देशभर में मैला ढोने की प्रथा पर रोक और सीवर सफाईकर्मियों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2013 में एमएस एक्ट बना था।

इस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने शासनादेश भी जारी किया था। यह एक्ट मुख्य रूप से सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई में सुरक्षा उपाय अपनाने को बनाया गया था, लेकिन भूमिगत नालों में सीवर गिरने से वह भी गैस चैंबर बन गए हैं।

एमएस एक्ट का पालन न होने पर पूर्व सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई थी। उसके बाद बैकफुट पर आए शासन ने 16 मार्च 2023 को सभी निकायों के लिए 30 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की थी।

इसमें स्पष्ट कहा गया था कि सीवर या गहरे नाले की सफाई के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर संबंधित नगर निकाय और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर विधिक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन ये बिंदु कागजों में उलझ कर रह गए।

गाइडलाइन का भी पालन नहीं

गाइडलाइन के मुताबिक, भूमिगत नाले या सीवर की सफाई से एक घंटा पहले चैंबर खोला जाना चाहिए, ताकि जहरीली गैसें बाहर निकल जाएं। सफाई मशीन से कराई जाए। जरूरी होने पर अनुभवी श्रमिक को मैनहोल में उतारा जाए। उनकी लिखित अनुमति और संबंधित अधिकारी की मौजूदगी जरूरी है।

वर्ष 1993 से लेकर अब तक हुए हादसे बताते हैं कि तंत्र सिर्फ मुआवजा बांट रहा है। वर्ष 2023 तक लखनऊ, रायबरेली, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, बरेली, गाजियाबाद, हाथरस, आगरा, पीलीभीत, मथुरा, मोदी नगर में 37 मृतक श्रमिकों के आश्रितों को मुआवजा बांटा जा चुका है।

एमएस एक्ट 2013 के प्रमुख बिंदु

  • हाथ के दस्ताने, आक्सीजन मास्क, सुरक्षा पेटी, सुरक्षा चश्मे, गम बूट, टार्च होना चाहिए।
  • सफाई के लिए मशीन का संचालन निर्धारित विधि व सुपरवाइजर की देखरेख में किया जाए।
  • पंजीकृत ठेकेदारों के अलावा नगर निकाय व संस्थाओं के प्रभारी भी जिम्मेदार होंगे।
  • सफाई का काम तब कराया जाएगा, जब उसमें न्यूनतम सीवर की मात्रा होगी।
  • सफाई के दौरान आगे पीछे के दो चेंबर खोले जाएंगे और मौके पर तीन कर्मचारी रहेंगे, जिसमें एक पर्यवेक्षक होगा।
  • अगर भूमिगत नाला या सीवर चैंबर पांच मीटर से गहरा है तो मशीन से सफाई होनी चाहिए।
  • श्रमिकों को भूमिगत नाला या सीवर चैंबर की सफाई का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
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