पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का अगला दौर सोमवार को इस्लामाबाद में हो सकता है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल रविवार को पहुंचेंगे। यह वार्ता क्षेत्र में तनाव कम करने के कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच वार्ता का अगला दौर सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल रविवार को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कई स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
पाकिस्तान की सराहना
इस बीच शहबाज शरीफ से शेख तमीम बिन हमद अल थानी और रजब तैयब एर्दोगन ने मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्र में शांति बहाली और कूटनीतिक समाधान को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। नेताओं ने इस दिशा में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना भी की।
बैठक अंटाल्या डिप्लोमेसी फोरम के इतर हुई, जहां वैश्विक नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श किया।
उधर, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान में ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ से मुलाकात की। इस दौरान अमेरिका-ईरान वार्ता को पुनर्जीवित करने के प्रयासों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह मुलाकात संभावित वार्ता के लिए जमीन तैयार करने की दिशा में अहम कदम है।
गौरतलब है कि 11-12 अप्रैल को आयोजित “इस्लामाबाद पीस टॉक्स” अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय आमने-सामने की बातचीत का पहला प्रयास था, हालांकि यह निष्कर्षहीन रहा। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच इस तरह की सीधी वार्ता बेहद दुर्लभ रही है।
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन का युद्धविराम
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन के युद्धविराम की घोषणा की है। यह कदम क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने जोसेफ औन और बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की, जिसके बाद दोनों पक्ष अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हुए।
पश्चिम एशिया में जारी उथल-पुथल के बीच इन कूटनीतिक प्रयासों को क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी है, जिससे किसी ठोस नतीजे की उम्मीद जताई जा रही है।





