मौदहा (हमीरपुर)। स्थानीय बार एसोसिएशन की बैठक में अधिवक्ताओं की एकजुटता और प्रशासन के खिलाफ चल रहे संघर्ष के बीच उस समय बड़ा संकट खड़ा हो गया, जब नेतृत्व द्वारा अंतिम निर्णय सुरक्षित रखने से नाराज करीब आधा दर्जन पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। इससे पूर्व, बैठक में मौजूद 98 प्रतिशत अधिवक्ताओं ने हाथ उठाकर क्रमिक अनशन को अपना समर्थन दिया।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष हयात अहमद एडवोकेट की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और उनके पेशकार के व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की। अधिवक्ताओं का आरोप है कि एसडीएम का बार को संबोधित पत्र उनके पास पहुँचने से पहले ही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गया, जो उनकी खराब मंशा को दर्शाता है। हालांकि पेशकार के स्थानांतरण के बाद न्यायिक कार्य शुरू कर दिया गया था, लेकिन एसडीएम के व्यवहार में सुधार न होने को लेकर अधिवक्ता अभी भी लामबंद हैं।
बैठक के दौरान वक्ताओं ने संगठन की एकता और अनुशासन पर जोर दिया। लेकिन जब अनशन के समर्थन में तत्काल कोई ठोस निर्णय घोषित करने की मांग उठी, तो कार्यकारिणी ने अंतिम फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया। इस टालमटोल की नीति से नाराज होकर प्रबंध कार्यकारिणी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवरीनारायण निगम, कनिष्ठ उपाध्यक्ष भूपत प्रजापति, कोषाध्यक्ष अफरोज आलम, संयुक्त सचिव अभिषेक निगम व राजबहादुर यादव और ऑडिटर अरुण कुमार ने अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया।
एक ओर जहाँ संगठन के भीतर अंतर्कलह सामने आई है, वहीं दूसरी ओर क्रमिक अनशन के दूसरे दिन अधिवक्ता बरदानी प्रसाद के साथ वसी अहमद, रामप्रकाश प्रजापति और राकेश वर्मा धरने पर मजबूती से डटे रहे। पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद अब बार एसोसिएशन के नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है कि वे प्रशासन के खिलाफ आंदोलन की अगली दिशा जल्द स्पष्ट करें। बैठक का संचालन एडवोकेट उमाशंकर त्रिपाठी ने किया, जिसमें जयप्रकाश शुक्ला, विनय तिवारी, ज्ञानचंद द्विवेदी, मूलचंद राजपूत, काजी अजमत और कामता प्रसाद निगम सहित भारी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।





