अम्बेडकरनगर जहांगीरगंज नगर पंचायत जहांगीरगंज में विकास कार्यों का हाल ऐसा है कि जनता पूछ रही है — यह नाला बन रहा है या भ्रष्टाचार का स्मारक? सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च हुए, लेकिन जमीन पर जो दिखाई दे रहा है वह अधूरा नाला, खुले गड्ढे और जनता की बढ़ती परेशानी है।
मोहल्ला फत्तेहपुर बीबीरामपुर में हरि मिस्त्री के घर से लेकर लालचंद गुप्ता के घर के सामने तालाब तक नाला निर्माण का काम करीब दो माह पहले शुरू हुआ था। लोगों को लगा था अब जल निकासी सुधरेगी, मगर हुआ उल्टा — रास्ता खोदकर काम अधूरा छोड़ दिया गया। अब जनता नाले से कम, जिम्मेदारों के कारनामों से ज्यादा परेशान है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और अधिशासी अधिकारी की जुगलबंदी में मानक किनारे रख दिए गए और घटिया सामग्री से निर्माण कराया गया। पीली ईंटों का ऐसा इस्तेमाल हुआ कि लोग कह रहे हैं — ईंट कम, पापड़ ज्यादा लग रही हैं! मोहल्ले के युवक विनय कुमार ने जब ईंट उठाकर हल्के हाथ से दूसरी ईंट से टकराई, तो ईंटें ऐसे टूटीं जैसे चुनावी वादे मतदान के बाद टूटते हैं। यह दृश्य देखकर लोग बोले — अगर यही गुणवत्ता बात है तो बरसात आने से पहले नाला खुद इस्तीफा दे दिया।
सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को है जिनके घरों के सामने रास्ता खुदा पड़ा है। लालचंद गुप्ता की पत्नी ने बताया कि 30 अप्रैल को उनकी बेटी की शादी है, लेकिन घर के सामने सड़क और नाले का हाल देखकर पूरा परिवार चिंता में है। मेहमान आएंगे तो बारात पहले गड्ढा पार करेगी या मंडप पहुंचेगी — यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत की गई, लेकिन नगर पंचायत कार्यालय में शिकायतों का वही हाल हुआ जो अक्सर फाइलों का होता है — धूल खाओ और चुप रहो।
लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि चेयरमैन, ठेकेदार और अधिकारियों की तिकड़ी ऐसी मजबूत है कि हर काम में कमीशन पहले निकलता है और काम बाद में अधूरा छूट जाता है। फिलहाल जहांगीरगंज में नाले से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि विकास कार्य हो रहा है या “लूट एंड लीव योजना” चलाई जा रही है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार जागते हैं या फिर जनता अगली बरसात में नाव खरीदने की तैयारी करे।





