बांसी सिद्धार्थनगर। सरकारी धन के बंदरबांट और सिस्टम की लापरवाही का एक अनोखा मामला विकास खंड बांसी से सामने आया है। यहाँ एडीओ पंचायत कार्यालय में अटैच एक शौचालय पिछले कई वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि इस निर्माण के बारे में ब्लॉक के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी के पास कोई जानकारी नहीं है।ब्लॉक परिसर में स्थित यह शौचालय आज एक “अनसुलझी पहेली” बन चुका है। मौके पर स्थिति यह है कि न तो यहाँ सीट लगी है, न ही दरवाज़े। बिना ढक्कन के खुला पड़ा सेफ्टिक टैंक न केवल भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहा है, बल्कि परिसर में आने-जाने वालों के लिए खतरे का सबब भी बना हुआ है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस शौचालय का निर्माण पूर्व में क्षेत्र पंचायत निधि से शुरू कराया गया था। लेकिन इसी बीच नगर पालिका द्वारा परिसर में “सामुदायिक पिंक शौचालय” का निर्माण करा दिया गया। आरोप है कि भ्रष्टाचारियों ने इसी का लाभ उठाया और अधूरे शौचालय को कागजों पर पूर्ण दिखाकर भुगतान की बंदरबांट कर ली।जब इस संबंध में जानकारी जुटानी चाही गई, तो प्रशासन के हाथ खड़े नजर आए वर्तमान में कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि इस शौचालय का निर्माण किस मद से और किस ठेकेदार द्वारा कराया गया था। निर्माण की फाइलें कहाँ हैं और भुगतान किसे हुआ, इस पर सब मौन हैं।
खंड विकास अधिकारी का ने इस संबंध में खंड विकास अधिकारी (BDO) का कहना है कि वे इस अधूरे शौचालय की मरम्मत करवाएंगे।अगर प्रशासन को यह नहीं पता कि निर्माण किसने कराया, तो मरम्मत किसकी कराई जाएगी. क्या किसी “दानवीर” ने गुप्त रूप से इसका ढांचा खड़ा किया था या फिर यह भ्रष्टाचार की परतों को ढंकने की एक और कोशिश है। जो बना ही नहीं, उसकी मरम्मत कैसी,स्थानीय लोगों और ब्लॉक आने वाले फरियादियों का कहना है कि जो निर्माण कभी अपने पूर्ण स्वरूप में आया ही नहीं, उसकी मरम्मत का दावा हास्यास्पद है। बिना जांच के मरम्मत कराना पुराने भ्रष्टाचार के साक्ष्यों को मिटाने जैसा होगा।अब देखना यह है कि प्रशासन इस “लावारिस” शौचालय के असली जिम्मेदार पर कार्रवाई करता है या फिर लीपापोती कर फाइल बंद कर दी जाती है।





