महोबा। नगर के बाघ विराजन धाम में पंडित नरेंद्र दुबे के सानिध्य चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा दौरान कथा व्यास अवध कृष्ण महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनमोहक मंचन किया, जिसमें पूतना वध, माखन चोरी, गोवर्धन पूजा और मैया यशोदा को ब्रह्मांड दर्शन जैसे प्रसंगों को जीवंत किया गया। इन दिव्य लीलाओं के वर्णन से पांडाल ’नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा और माहौल कृष्णमय हो गया।
कथा व्यास ने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा कि बृजवासी इंद्र को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ की तैयारी कर रहे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि आप इंद्र के लिए यज्ञ क्यों कर रहे हो। नंद बाबा ने कहा कि अगर हम इंद्र के लिए यज्ञ नहीं करेंगे तो इंद्र देवता वर्षा नहीं करेंगे।
अगर इंद्र वर्षा नहीं करेंगे तो हमारे खेत में कुछ भी पैदा नहीं होगा। कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा, जिससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार बारिश की। कृष्ण ने तब गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। महाराज ने कहा कि यह कथा श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र का अहंकार तोड़ने और प्रकृति की पूजा के महत्व को स्थापित करने से जुडी है।
कथा वाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अत्याचार के अंत और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। उन्होंने कंस के अत्याचारों से पीड़ित जनता को मुक्ति दिलाने के लिए अवतार लिया। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण की गोकुल और वृंदावन की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए पूतना वध, कालिया नाग दमन और माखन चोरी की लीलाओं के माध्यम से बताया कि भगवान अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मनुष्य को सच्चे मार्ग की प्राप्ति होती है।
श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें प्रेम, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। इस मौके पर मां बाघ विराजन धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह यादव, बुद्ध सिंह यादव भगत, भोला सिंह यादव, बद्री प्रसाद द्विवेदी, नवल किशोर गुप्ता शिक्षक सुरेंद्र बहादुर सक्सेना सहित भारी संख्या में भक्तग भगवान श्री कृष्णा की लीलाओं की कथाओं का श्रवण कर भक्ति भाव में लीन होकर अपने जीवन को सफल बना रहे हैं।





