सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ SEBI के ₹447.27 करोड़ लौटाने के आदेश को रद कर दिया है। अदालत ने SEBI को रिलायंस द्वारा जमा किए गए ₹250 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया और धोखाधड़ी के आरोप भी खारिज कर दिए।
मुकेश अंबानी की रिलायंस को लेकर एक बड़ी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 मई) को, नवंबर 2007 के पेट्रोलियम फ्यूचर्स ट्रेडिंग मामले (रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम SEBI) में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के ₹447.27 करोड़ लौटाने के निर्देश को रद कर दिया।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने SEBI को आगे यह निर्देश दिया कि वह ₹250 करोड़ की राशि वापस करे, जिसे रिलायंस पहले ही जमा कर चुका था। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने SEBI द्वारा कंपनी के खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी के आरोपों को भी रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत ने RIL पर लगाए गए ₹25 करोड़ के अलग जुर्माने को बरकरार रखा।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा मामला साल 2007 का है। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी सब्सिडियरी रिलायंस पेट्रोलियम में अपनी 5% हिस्सेदारी (22.5 करोड़ शेयर) बेचकर फंड जुटाने का फैसला किया था। इसके लिए रिलायंस ने अपनी 12 कंपनियों को बतौर एजेंट नियुक्त किया। इन कंपनियों ने 2007 के RPL फ्यूचर्स में ₹265.67 प्रति शेयर की औसत कीमत पर 9.92 करोड़ शेयरों की नेट शॉर्ट पोजिशन ली थी। और बाद में 6 से 29 नवंबर, 2007 के बीच, RIL ने कैश सेगमेंट में RPL के 20.29 करोड़ शेयर बेच दिए। इससे रिलायंस को लगभग 4500 करोड़ रुपये मिले। और उसे लगभग ₹513 करोड़ का अतिरिक्त मुनाफा हुआ।
इस खरीदारी को SEBI ने सुनियोजित धोखाधड़ी वाली योजना बताया था। मार्च 2017 में, SEBI के पूर्णकालिक सदस्य ने यह माना कि RIL ने एक धोखाधड़ी वाली और हेर-फेर की रणनीति अपनाई थी। RIL को 12% ब्याज के साथ ₹447.27 करोड़ लौटाने का निर्देश दिया गया। RIL और 12 अन्य संस्थाओं पर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग करने पर भी एक साल के लिए रोक लगा दी गई।
RIL ने Securities Appellate Tribunal (SAT) के सामने इस आदेश को चुनौती दी। हालांकि, उसकी अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद उनसे सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चैलेंज किया। और SC ने सेबी के आदेश को रद कर दिया। अब 2007 से चल रहा यह केस पूरी तरह से खत्म हो चुका है।





