Thursday, April 16, 2026
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समुद्र मंथन और राजा बलि के प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में गूंजा श्रीकृष्ण जन्म का उल्लास

कंस के अत्याचारों और भगवान के प्राकट्य कथा की प्रस्तुति

सिद्धार्थनगर। शहर के श्री सिहेंश्वरी देवी मंदिर के निकट श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में शुक्रवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान अंतरराष्ट्रीय कथावाचक संत आलोकानंद दास ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म का प्रसंग अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।

श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन करते हुए उन्होंने कंस के अत्याचारों और भगवान के प्राकट्य की कथा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक संत आलोकानंद दास ने समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाते हुए देवताओं और असुरों के बीच हुए संघर्ष तथा अमृत प्राप्ति की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि जीवन में संघर्ष के बाद ही सफलता और अमृत रूपी फल की प्राप्ति होती है।

कथावाचक ने राजा बलि के त्याग और दान की महिमा का भी उल्लेख किया। वामन अवतार की कथा के माध्यम से उन्होंने सिखाया कि सच्चा दान और विनम्रता ही व्यक्ति को महान बनाती है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और पूरे परिसर में जयकारों की गूंज रही। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। इस मौके पर विधायक श्यामधनी राही, मुख्य यजमान नर्वेदश्वर सिंह, डॉ. विनयकांत उपाध्याय, आशा उपाध्याय, गरिमा आदि की उपस्थिति रही।

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