नई दिल्ली। ज्यूडिशियल काउंसिल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से देशभर के मध्यम और छोटे समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापनों के आवंटन के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी नीति लागू करने का आग्रह किया है।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने कहा कि मध्यम और छोटे समाचार पत्र लोकतंत्र के अहम स्तंभ हैं, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में। ये समाचार पत्र सरकार और नागरिकों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं, जिससे जननीतियों, कल्याणकारी योजनाओं और शासन से जुड़ी जानकारी समाज के दूरदराज के वर्गों तक पहुंचती है।
अपने पत्र में ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने छोटे प्रकाशनों के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जो सरकारी विज्ञापनों तक सीमित पहुंच के कारण उत्पन्न हो रही हैं। काउंसिल ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में बड़े मीडिया संस्थानों को अधिक प्राथमिकता मिल रही है, जिससे छोटे और क्षेत्रीय समाचार पत्रों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। यह असंतुलन न केवल इन प्रकाशनों के भविष्य के लिए खतरा है, बल्कि मीडिया विविधता और स्थानीय मुद्दों के प्रतिनिधित्व को भी कमजोर करता है।
श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा, “मध्यम और छोटे समाचार पत्रों का अस्तित्व जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संवाद की मजबूती से सीधे जुड़ा हुआ है। इन्हें नजरअंदाज करना जनता की एक महत्वपूर्ण आवाज को दबाने के समान होगा।” ज्यूडिशियल काउंसिल ने सरकार से मांग की है कि वह एक संरचित और समानतापूर्ण व्यवस्था लागू करे, जिससे योग्य समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापन नीतियों में व्यापक रूप से शामिल किया जा सके। ज्यूडिशियल काउंसिल ल ने स्पष्ट और सरल एम्पैनलमेंट (पंजीकरण) मानदंड बनाने की भी सिफारिश की है, जिसमें उचित पंजीकरण, संतुलित प्रसार संख्या और पत्रकारिता के नैतिक मानकों का पालन शामिल हो।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने यह भी रेखांकित किया कि सरकारी विज्ञापनों तक निष्पक्ष पहुंच प्रदान करने से न केवल इन समाचार पत्रों को आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी, बल्कि मीडिया क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। छोटे और मध्यम प्रकाशनों को सशक्त बनाने से पत्रकारों की भर्ती में वृद्धि, रिपोर्टिंग के स्तर में सुधार और सटीक एवं समयबद्ध जानकारी के प्रसार को बढ़ावा मिलेगा।
मीडिया जगत के लोगों ने भी इस मांग का व्यापक समर्थन किया है, यह मानते हुए कि एक संतुलित विज्ञापन नीति स्वतंत्र और बहुलतावादी प्रेस के लिए अत्यंत आवश्यक है। ज्यूडिशियल काउंसिल ने दोहराया कि सरकारी विज्ञापनों का समान वितरण केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आवश्यकता है, जो समावेशिता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
इसके अतिरिक्त, श्री अग्निहोत्री ने मंत्री से एक सुदृढ़ निगरानी और समीक्षा तंत्र स्थापित करने का भी आग्रह किया, ताकि नीति का निष्पक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके और इसका लाभ वास्तविक प्रकाशनों तक पहुंचे। समय-समय पर मूल्यांकन से प्रणाली को और बेहतर बनाने तथा उसकी पारदर्शिता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
अपने पत्र के अंत में, ज्यूडिशियल काउंसिल ने विश्वास व्यक्त किया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, जो रेल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं, इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर शीघ्र और सकारात्मक कदम उठाएंगे।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने जोर दिया कि मध्यम और छोटे समाचार पत्रों को सशक्त बनाना भारतीय लोकतंत्र की नींव को और मजबूत करेगा, जिससे हर आवाज चाहे वह कितनी ही छोटी या दूरस्थ क्यों न हो सुनी और प्रतिनिधित्वित हो ।





