कई लोगों के लिए परफॉर्मिंग आर्ट्स की दुनिया में कदम रखने की शुरुआत बचपन की किसी रुचि से होती है। सुशोभन सोनू राय के मामले में भी ऐसा ही हुआ। नृत्य के प्रति उनका आकर्षण ही उन्हें पहली बार मंच तक लेकर आया और वहीं से धीरे-धीरे उनका रुझान अभिनय और मॉडलिंग की ओर बढ़ा। समय के साथ उन्हें टेलीविजन धारावाहिकों, विज्ञापनों और बाद में फिल्मों में काम करने का अवसर मिला।
सुशोभन का जन्म कोलकाता के एक बंगाली हिंदू परिवार में हुआ। हालांकि बचपन से ही जीवन आसान नहीं रहा। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया। उस समय उनकी उम्र मात्र साढ़े तीन वर्ष थी। उनके पिता कोलकाता के वीईसीसी (VECC) में कार्यरत थे। पिता के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी माँ पर आ गई। नौकरी संभालने के साथ-साथ उन्हें घर और बच्चे के भविष्य की जिम्मेदारी भी अकेले ही निभानी पड़ी। जीवन के उस दौर ने सुशोभन के भीतर संघर्ष और आत्मविश्वास दोनों को मजबूत किया।
बचपन से ही उन्हें नृत्य के प्रति गहरा लगाव था। उन्होंने एक डांस इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया और लगभग दो वर्षों तक वेस्टर्न डांस का प्रशिक्षण प्राप्त किया। पॉप डांस उनकी पसंदीदा शैली थी। उन्होंने कई मंचीय कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लिया, जिससे उनकी परफॉर्मिंग क्षमता और निखरी। परिवार चाहता था कि वे संगीत की ओर जाएं, लेकिन अपनी रुचि के कारण उन्होंने नृत्य को ही अपने करियर का पहला कदम बनाया।
पढ़ाई के मामले में भी सुशोभन नियमित रहे। वर्ष 2016 में उन्होंने दमदम मोतिजील रवींद्र महाविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने मुंबई में विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए ऑडिशन दिए। कुछ समय बाद वे कोलकाता लौट आए। वहां लगभग दो वर्षों तक उन्होंने निर्देशक और निर्माता पियूष साहा के मार्गदर्शन में अभिनय कार्यशालाओं और प्रशिक्षण में भाग लिया। इसी दौरान उन्होंने अभिनय की बुनियादी और आवश्यक कौशल विकसित किए।
साल 2019 में उन्होंने आकाश आठ चैनल के धारावाहिक ‘आनंदमयी माँ’ से टेलीविजन पर अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। दिवंगत निर्देशक देविदास भट्टाचार्य के निर्देशन में वे एक वैष्णव भक्त की भूमिका में नजर आए। इसके बाद उन्होंने लगातार कई धारावाहिकों में काम किया, जिनमें स्टार जलसा के ‘मोहर’, ‘कोड़ापाखी’, ‘तितली’, ‘खेलाघर’ और जी बांग्ला के ‘जमुना ढाकी’ शामिल हैं। खासतौर पर ‘कोड़ापाखी’ में पार्नो मित्रा के साथ एक नकारात्मक भूमिका निभाने से उनके अभिनय करियर में एक अलग आयाम जुड़ा।
कोविड-19 महामारी के दौरान जब टेलीविजन के काम की गति धीमी पड़ गई, तब सुशोभन ने मॉडलिंग की ओर ध्यान देना शुरू किया। वर्ष 2023 से उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के विज्ञापनों में काम करना शुरू किया। एक मॉडल के रूप में वे हॉलिडे इन होटल, डाबर, वेलोसिटी आईवेयर, अमेज़न, स्पेंसर, बिग बाज़ार सहित कई ब्रांड्स के साथ काम कर चुके हैं।
इसके अलावा सुसोवन ने एक ब्यूटी पेजेंट में भी हिस्सा लिया। कोलकाता में आयोजित ‘एथनिक एलीगेंस 2025’ प्रतियोगिता में वे फर्स्ट रनर-अप बने। इस प्रतियोगिता में उन्होंने पोर्टफोलियो प्रेजेंटेशन, रैंप वॉक और इंटरव्यू जैसे तीन चरणों को सफलतापूर्वक पार किया।
टेलीविजन और मॉडलिंग के बाद अब उन्होंने बंगाली सिनेमा में भी कदम रखा है। फिल्म ‘टेक केयर भालोबाशा’ में उन्होंने ‘जॉय’ नामक किरदार निभाया है। यह उनका पहला बड़े पर्दे का काम है। फिल्म की कहानी चार दोस्तों और उनके रिश्तों में आने वाले उतार-चढ़ाव के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी के विभिन्न मोड़ों पर जॉय का किरदार अन्य पात्रों की भावनात्मक दिशा को प्रभावित करता है। कभी संयमित, कभी संकोची और कभी सहज मित्रता के भाव के साथ यह किरदार कहानी के माहौल को आगे बढ़ाता है।





