हमीरपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ योजना का एक कड़वा सच बुधवार को हमीरपुर जिला कलेक्ट्रेट में देखने को मिला, जिसने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया। दोनों पैरों से दिव्यांग एक महिला अपने मजदूर पति की गोद में बैठकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची और महीनों से सूखे पड़े नल के लिए जल आपूर्ति की गुहार लगाई। यह मार्मिक दृश्य सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि ‘हर घर जल’ पहुंचाने की सरकारी प्रतिबद्धता पर एक करारा तंज है।
’गंगा’ आई, पर पानी नहीं आया!
मसगांव (मुस्करा ब्लॉक) निवासी गायत्री देवी के घर नमामि गंगे योजना के तहत नल कनेक्शन तो लग गया, लेकिन महीनों से उसमें से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है। योजना का नाम ‘नमामि गंगे’ है, पर गायत्री के नल का हाल ‘सूखा’ है। विडंबना देखिए, जिस योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, उसी का लाभ लेने के लिए एक दिव्यांग महिला को अपने पति पर निर्भर होकर, गोद में बैठकर, सरकारी दफ्तर के दरवाजे तक पहुंचना पड़ा।
बाक्स “” : नमामि गंगे योजना के तहत नल तो लग गया, पर वह एक शोपीस बनकर रह गया है। गरीब और दिव्यांग को आज भी पानी के लिए ‘नल’ नहीं, बल्कि अपने ‘मजदूर पति’ की गोद का सहारा लेना पड़ रहा है। क्या यही है सरकारी योजनाओं की ‘घर-घर’ पहुंच?”
आँखों में आँसू, डीएम ने दिए निर्देश
चलने-फिरने में असमर्थ गायत्री ने जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में अपनी व्यथा बताई। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उनके मजदूर पति को दूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है, जिससे उनकी रोजमर्रा की कमाई भी प्रभावित होती है। महिला की यह मार्मिक दशा देखकर जिलाधिकारी समेत कार्यालय में मौजूद सभी लोग भावुक हो उठे। जिलाधिकारी ने तुरंत संबंधित विभाग को जांच कर तत्काल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
यह घटना दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की घोषणा और उनके क्रियान्वयन में कितना बड़ा अंतर है। एक तरफ भव्य प्रचार है, दूसरी तरफ जमीन पर मूलभूत सुविधा के लिए एक बेबस परिवार की जद्दोजहद। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो न सिर्फ सरकारी उदासीनता पर सवाल उठा रहा है, बल्कि यह भी पूछ रहा है कि क्या ‘नमामि गंगे’ जैसी योजनाएं सिर्फ कागजी घोड़े बनकर रह जाएंगी?





