आज एजुकेशन मिनिस्ट्री डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिट्रेसी के सेक्रेटरी संजय कुमार ने ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इससे अंकों की गणना में गलतियां पूरी तरह से समाप्त हो गई हैं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 13 मई को 12th क्लास का रिजल्ट जारी किया जा चुका है। इस बार बोर्ड द्वारा 12th क्लास की कॉपियों की जांच ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) के आधार पर की गई। इससे अंकों की गणना में होने वाली गलतियां पूरी तरह से समाप्त हो गईं। इसी को एजुकेशन मिनिस्ट्री डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिट्रेसी के सेक्रेटरी संजय कुमार ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कई सवालों के जवाब दिए। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज भी उपस्थित रहे।
2014 से शुरू हुई थी पहल
सेक्रेटरी संजय कुमार की ओर से ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर जानकारी दी गई है कि यह पहली बार नहीं है कि इस प्रकार से मार्किंग की गई है। इसे वर्ष 2014 से शुरू किया गया था लेकिन “उस समय, तकनीकी दृष्टिकोण से, मौजूदा बुनियादी ढांचे और व्यवस्था के कारण इसे तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद इसे पुनः इस वर्ष से लागू किया गया।
उन्होंने अपनी बात आगे रखते हुए ओएसएम की मार्किंग प्रणाली के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले चरण में उत्तर पुस्तिकाओं को एक गुप्त कोड दिया जाता है। इसके बाद, उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता जांच की जाती है। प्रत्येक सेट के लिए एक अलग मार्किंग स्कीम होती है, जिसे विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाता है और विशेषज्ञों के एक अलग समूह द्वारा उसकी समीक्षा की जाती है।
आगे उन्होंने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षकों द्वारा प्रत्येक चरण का अंकन किए बिना उत्तर पुस्तिका जमा नहीं की जा सकती। प्रत्येक चरण के लिए दिए गए अंक और फिर प्रत्येक उत्तर के लिए अंतिम अंक का उल्लेख करना अनिवार्य है। इससे परीक्षा का मानकीकरण सुनिश्चित होता है, जिसे पूरी प्रक्रिया में बनाए रखा जाता है।
7 चरणों में पूर्ण होती है ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM)
- सीबीएसई द्वारा पहले साझा की गई डिटेल के मुताबिक ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) 7 चरणों में पूर्ण होती है।
- छात्रों को बोर्ड परीक्षा ऑफलाइन ही देनी होगी। केंद्र पर कॉपियां विषय के अनुसार 20, 32 और 40 पेज की उपयोग में लाई जाती हैं।
- दूसरे चरण में कॉपियों को हाई सिक्योरिटी में स्कैन किया जाता है। ध्यान देने वाली बात है कि कॉपी के सभी पेजों को स्कैन किया जाता है जिससे हर पेज की डिजिटल इमेज क्रिएट हो सके। सभी कॉपियों को एक यूनिक कोड आवंटित होता है। कॉपियों की जांच के टाइम किसी भी छात्र का नाम व रोल नंबर टीचर्स को नहीं दिखेगा इससे पक्षपात की संभावना भी खत्म हो जाती है।
- कॉपियों को एक्सेस करने के लिए टीचर्स को OASIS आईडी (Online Affiliated Schools Information System) में जाकर ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल पर लॉग इन करना होता है। इसके बाद उनको कितनी कॉपियां जांचने के लिए आवंटित हुई हैं पता चलता है। टीचर्स को जितनी कॉपियां आवंटित होती हैं उतनी ही जांच कर सकते हैं।
- लॉग इन करने के बाद टीचर्स छात्रों की कॉपी को एक्सेस कर पाते हैं। हर प्रश्न का पूर्णांक और प्राप्तांक का कॉलम होता है। टीचर्स इसके बाद छात्र को किस प्रश्न के लिए कितने अंक प्राप्त हुए हैं कॉलम में भरते हैं।
- टीचर्स को केवल प्राप्त अंकों की जानकारी भरनी होती है। इसके बाद कंप्यूटर टोटल अंकों की गणना खुद ही कर देता है।
कॉपियों की जांच को ट्रैक किया जाता है और देखा जाता है कि टीचर ने कितनी देर में कॉपी की जांच पूरी की है। आवश्यकता पड़ने पर कॉपी को रीचेक भी करवाया जाता है। - कॉपियों की जांच होते ही छात्रों की अंकों का डाटा सीधे सीबीएसई के रिजल्ट डाटा बेस में सेव हो जाता है।





