उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रधानमंत्री की अपील पर अपने आधिकारिक काफिले में 50% की कमी की है। राज्य के मंत्री भी अपने काफिले घटा रहे हैं, जिससे जम्मू-कश्मीर में वीआईपी संस्कृति पर लगाम लग सके और सरकारी खर्चों में कटौती हो।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने अधिकारिक काफिले को 50 प्रतिशत कम कर दिया है। इस बीच, प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने भी अपने साथ चलने वाले वाहनों के काफिले को कम करने का फैसला लिया है।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत दिनों ईरान-अमेरिका सैन्य तनाव के चलते पैदा ईंधन के संकट को देखते हुए सभी से ईंधन बचाने के उपायों को अपने रोजमर्रा के जीवन में शामिल करने और सरकारी संसाधनों का पूरी जिम्मेदारी से सदुपयोग करने की अपील की है।
लोकभवन से मिली जानकारी के अनुसार, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करते हुए अपने अधिकारिक काफिले को 50 प्रतिशत तक कम कर दिया है। उपराज्यपाल ने लोकभवन सचिवालय में तैनात अधिकारियों व कर्मियों से भी अपील की है कि वह सरकारी संसाधनों के सदुपयोग को सुनिश्चित बनाते हुए सरकारी कामकाज में गैर जरुरी खर्च यथासंभव कम करें।
लोकभवन के प्रवक्ता ने बताया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने काफिले में कमी का निर्णय स्वयं से सुधार की शुरुआत के सिद्धांत के तहत जम्मू-कश्मीर में कुशल शासन के लिए एक आदर्श स्थापित करनेऔर टिकाऊ प्रशासनिक उपायों को बढ़ावा देने के लिए लिया है।
सरकार भी खर्चाे को यथासंभव कम कर रही
इस बीच, परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने एक बातचीत में कहा कि बढ़ते ईंधन व आर्थिक संकट के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बचत के उपायों की अपील पर जम्मू-कश्मीर की सरकार भी अनावश्यक सरकारी खर्चाे को यथासंभव कम कर रही है। सभी मंत्री अपने काफिलों में भी कटाैती कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा ग्लोबल संकट से निपटने के लिए जरुरी है कि हम सभी चाहे कोई मंत्री हो या प्रशासनिक अधिकारी या आम नागरिक, सभी अपने अनावश्यक खर्चाें में कटौती करें, गैस, पेट्रोल, डीजल जैसे पदार्थाें की खपत में यथासंभव कमी लाएं। उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद जन प्रतिनिधित होते हैं, जनता के सेवकत होते हैं इसलिए उन्हें सबसे ज्यादा जिम्मेदारी और समझदारी के साथ काम करना चाहिए।





