दुनियाभर में हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या है, जिससे 2024 में 1.4 अरब लोग प्रभावित हैं। अब शोधकर्ताओं ने एक नया इंजेक्शन, जिलेबेसिरन, विकसित किया है जो रोजाना दवा लेने की बजाय साल में सिर्फ दो बार लेने से बीपी को कंट्रोल कर सकता है। बता दें, यह इंजेक्शन हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा कम करने में मददगार हो सकता है और विशेषज्ञ इसे भविष्य के लिए एक प्रभावी उपाय मान रहे हैं।
हाई ब्लड प्रेशर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में दुनियाभर में 30-79 साल की उम्र के 140 करोड़ लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या थी । ये आंकड़ा इस आयु वाले कुल लोगों का करीब 33% है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों में भी हाइपरटेंशन की दिक्कत बढ़ती जा रही है, जो कम उम्र में ही उन्हें कई प्रकार की क्रानिक बीमारियों का शिकार बनाने वाली हो सकती है।
हाइपरटेंशन के शिकार मरीजों को डाक्टर नियमित रूप से दवा लेते रहने की सलाह देते हैं, ताकि उन्हें ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण होने वाली समस्याओं जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी और आंखों की दिक्कतों से बचाया जा सके।
मरीजों को जीवनभर ये दवाएं लेनी पड़ सकती हैं। शोधकर्ताओं ने बीपी की दवाओं का विकल्प तलाश लिया है। शोधकर्ताओं ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि जल्द ही रोजाना बिना दवा लिए भी आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रख पाएंगे। इसके लिए विकल्प के तौर पर एक इंजेक्शन की चर्चा है, जिसे गोलियों की जगह साल में सिर्फ दो बार लेने से आप बीपी को कंट्रोल में रख पाएंगे। जिलेबेसिरन नाम के इस इंजेक्शन को विशेषज्ञ भविष्य के लिए असरदार उपाय के तौर पर देख रहे हैं।
हाइपरटेंशन और कई गंभीर समस्याओं का कम होगा खतरा
द लैंसेट जर्नल में इस इंजेक्शन से बीपी को मरीजों को होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से हाइपरटेंशन को मैनेज करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दशकों से मौजूद दवाओं के बावजूद हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या दुनियाभर में बढ़ती ही जा रही है। माना जा रहा है कि जिलेबेसिरन इंजेक्शन लंबे समय तक हाइपरटेंशन को कंट्रोल में रखने में मददगार हो सकता है । इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के साथ किडनी – आंख की समस्याओं के खतरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
कैसे काम करेगा यह इंजेक्शन?
फिलहाल ये अपने लेट- स्टेज ग्लोबल ट्रायल में हैं। साल में दो बार लगने वाले इस इंजेक्शन से हाई बीपी को कंट्रोल किया जा सकता है। रोश और एल्नीलम फार्मास्यूटिकल्स द्वारा विकसित जिलेबेसिरन इंजेक्शन को साल में दो बार लगवाने की जरूरत होगी। इसमें लिवर में एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को कम करने के लिए स्माल इंटरफेरिंग आरएनए (एआइआरएनए) टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया गया है। एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को धीमा कर यह इंजेक्शनछह महीने तक ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रख सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञ कहते हैं कि शुरुआती ट्रायल्स से पता चलता है कि ये इंजेक्शन असरदार हो सकता है, लेकिन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हाइपरटेंशन जिंदगी भर चलने वाली बीमारी है और ये थेरेपी अभी क्लिनिकल जांच के तहत हैं । स्टैंडर्ड इलाज यानी रोजाना ली जाने वाली दवाओं की जगह लेने के लिए ये कितनी प्रभावी है, फिलहाल दावा नहीं किया जा सकता है। बता दें कि द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, पिछले दो दशकों में बच्चों और किशोरों में हाई ब्लड प्रेशर के मामले लगभग दोगुना हो गए है। इसके कारण दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।





