अंबेडकरनगर जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीद शुरू हुए अभी दो सप्ताह भी नहीं बीते कि खरीद केंद्रों पर बोरी का भारी संकट खड़ा हो गया है। इसका सबसे ताजा मामला टांडा रोड स्थित सूरापुर धान खरीद केंद्र का सामने आया है, जो जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर है।केंद्र पर पहुंचे किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी नवीन सिंह उन्हें बार-बार बोरी खत्म होने का हवाला देकर वापस लौटा रहे हैं। कई किसान तो सुबह 5 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन शाम तक भी धान नहीं तुल पा रहा। एक किसान ने मीडिया से कहा, “हमारे पास धान तैयार है, टोकन भी है, लेकिन बोरी नहीं मिल रही। प्रभारी साहब कहते हैं कि राइस मिल वाले बोरी नहीं दे रहे। फिर हम क्या करें?
”जब मीडिया टीम ने सूरापुर केंद्र प्रभारी नवीन सिंह से इस बारे में बात की तो उनका जवाब था, “हमारे पास सीमित मात्रा में ही बोरी है। राइस मिल वाले समय पर बोरी नहीं सप्लाई कर रहे, हम क्या करें?” उन्होंने यह भी कहा कि ऊपर से जितनी बोरी आती है, उतनी ही दी जाती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केंद्र प्रभारी का काम सिर्फ ऊपर का इंतजार करना है या पहले से ही मिलर्स से समन्वय कर बोरी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करना?किसानों का कहना है कि जब वे बोरी लेकर खुद आते हैं तो भी केंद्र प्रभारी कई बहाने बनाकर धान नहीं ले रहे। एक किसान ने बताया, “पिछले साल भी यही दिक्कत थी, इस बार भी वही हाल है। केंद्र प्रभारी न तो मिलर्स से ठोस बात कर रहे हैं और न ही जिला प्रशासन को समय रहते सूचित कर रहे हैं।
”जिले के कई अन्य केंद्रों पर भी बोरी की कमी की शिकायतें आ रही हैं, लेकिन सूरापुर केंद्र का मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह मुख्यालय से सबसे नजदीक है। फिर भी यहां के प्रभारी की उदासीनता साफ दिखाई दे रही है।किसान अब मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार केंद्र प्रभारियों पर तुरंत कार्रवाई हो और बोरी की कमी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, वरना उनकी फसल सही समय पर नहीं बिक पाएगी और बिचौलियों के हाथों मजबूरन सस्ते में बेचनी पड़ेगी।जिला प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। देखना यह है कि बोरी संकट के लिए जिम्मेदार केंद्र प्रभारियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।





