महिलाएं अक्सर दूसरों की देखभाल में अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे तनाव, थकान और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
हमारे समाज में लड़कियों को बचपन से ही यह पाठ पढ़ाया जाता है कि दूसरों की देखभाल करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। परिवार और अपनों का ख्याल रखने की इस पूरी प्रक्रिया में महिलाएं अक्सर खुद को भूल जाती हैं और अपनी व्यक्तिगत जरूरतों व सेहत को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देती हैं।
क्या आप भी खुद को अहमियत देना भूल गई हैं?
लंबे समय तक खुद को अहमियत न देने का अंजाम उनकी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित होता है। अपनी अनदेखी करने से महिलाओं में तनाव, हर वक्त की थकान, नींद पूरी न होने और हार्मोन के बिगड़ने जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकती, बल्कि कई बार यह डिप्रेशन का रूप भी ले लेती है।
इस मानसिक दबाव का सीधा और बुरा असर उनके शरीर पर पड़ता है। इससे उनके शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर होने लगती है और गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
सेल्फ-केयर स्वार्थ नहीं, सबसे बड़ी जरूरत है
आकाश हेल्थकेयर के मनोचिकित्सा विभाग की एसोसिएट कंसल्टेंट, डॉ. पवित्रा शंकर के अनुसार, यह बेहद जरूरी है कि महिलाएं ‘सेल्फ-केयर’ को स्वार्थ की नजर से न देखें, बल्कि इसे अपनी एक बड़ी जरूरत समझें। इस समस्या से बचने के लिए महिलाओं को निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- दिन में कुछ समय केवल अपने लिए निकालना।
- एक अच्छा और संतुलित आहार लेना।
- नियमित रूप से व्यायाम करना।
- अपनी भावनाओं को बिना किसी झिझक के खुलकर व्यक्त करना।
यह समझना सबसे महत्वपूर्ण है कि एक महिला का खुद का स्वस्थ रहना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। जब वह खुद शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत और स्वस्थ रहेगी, केवल तभी वह अपने परिवार और समाज की बेहतरीन तरीके से देखभाल कर पाएगी। अपना ख्याल रखना ही बेहतर देखभाल की पहली सीढ़ी है।





