अंबेडकरनगर जिला कारागार वह जगह है जहाँ अपराधी सुधरने और समाज से दूर रखे जाने की उम्मीद की जाती है। लेकिन अंबेडकर नगर की जेल में हालात बिल्कुल उलटे नजर आ रहे हैं। रिहा हो चुके कई कैदियों ने दावा किया है कि यहाँ “ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो उपलब्ध न हो” — बस सही कीमत चुकानी पड़े। ड्रग्स, गांजा, नशीले पदार्थों से लेकर गन (अस्पताल) तक सब कुछ जेल के अंदर “उचित कीमत” पर मिल जाता है। एक रिहा कैदी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,“जेल के अंदर सब कुछ चलता है। ड्रग्स से लेकर गन तक। बाहर से सामान आता है, अंदर बिकता है। कीमत अच्छी लगे तो कोई समस्या नहीं।” सिर्फ नशीले पदार्थ और हथियार ही नहीं, जेल में ब्याज पर पैसे उधार देने का भी धंधा चल रहा है। कैदी एक-दूसरे को सूदखोरी पर पैसा देते हैं और मुनाफा कमाते हैं। रिहा कैदियों का कहना है कि यहाँ “कैदियों द्वारा ब्याज पर पैसे बांटे जाते हैं”।
एक अन्य पूर्व कैदी ने कहा,“मैं खुद यह नहीं खाता, लेकिन जो लोग अंदर रह चुके हैं उन्होंने बताया है कि जेल अब सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि एक छोटा सा बाजार बन चुकी है।” यह खुलासा अंबेडकर नगर जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अगर रिहा कैदियों की बात सही है तो जेल प्रशासन की नाकामी या मिलीभगत दोनों ही चिंता का विषय हैं। जेल महकमा अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं कर पाया है। स्थानीय पुलिस और जेल अधीक्षक से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने “जांच कर रहे हैं” कहकर टाल दिया।क्या जेल अब अपराधियों का सुधार गृह है या अपराध का अड्डा?क्या अंबेडकर नगर जिला कारागार में “सब कुछ उपलब्ध” का मॉडल राज्य भर में फैल चुका है? अब सच्चाई सामने आ रही है कि जेल की दीवारें अपराध को रोकने के बजाय उसे पनपने दे रही हैं।





