सामाजिक संगठनों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बयान और कैबिनेट के फैसले का स्वागत किया, उत्तर प्रदेश में भी योजना लागू करने की मांग की
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ाने वाली वीरांगना झलकारी बाई कोरी, रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना की सेनापति थी।जब अंग्रेजी सेना की ओर से झांसी के किले को चारों तरफ से घेर लिया गया तो उस समय झलकारी बाई ने रानी लक्ष्मीबाई के साथ गुप्त योजना तैयार करके रानी लक्ष्मीबाई को किले के पिछले गेट से सुरक्षित बाहर निकाल दिया और झांसी राज्य की आन,बान और शान की रक्षा के लिए रानी लक्ष्मीबाई की वेशभूषा में घोड़े पर सवार होकर वीरता पूर्वक लड़ाई लडी। भारतीय इतिहासकारों की भेदभावपूर्ण लेखनी की शिकार रही इस वीरांगना का इतिहास 1990के दशक में पूर्ण रूप से प्रकाश में आया है।
देश की राजधानी दिल्ली की सरकार ने वीरांगना झलकारी बाई की शौर्य गाथा को संज्ञान में लिया और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैबिनेट की बैठक में निर्णय लेते हुए वीरांगना झलकारी बाई को प्रख्यात हस्तियों की जयंती/पुण्यतिथि योजना में शामिल किया है।अब दिल्ली में अन्य महापुरुषों की तरह झलकारी बाई की जयंती भी सरकारी खर्चे पर सरकारी आयोजनों के रूप में मनाई जाएगी। प्रदेश के कोरी समाज के सभी संगठनों ने दिल्ली सरकार के फैसले का स्वागत किया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वीरांगना झलकारी बाई की जयंती सरकारी आयोजनों में शामिल करने के साथ 22नवम्बर को सार्वजनिक अवकाश की मांग की है।
दिल्ली सरकार का यह निर्णय सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। 22नवम्बर को वीरांगना झलकारी बाई कोरी की195वीं जयंती धूमधाम से मनाने की तैयारी में लगे संगठनों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक अशोक कोरी ने कहा कि दिल्ली सरकार का फैसला स्वागत योग्य कदम है। भाजपा नेत्री रश्मि सिंह ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई राष्ट्र की गौरव हैं। राष्ट्रनायकों, वीरों और वीरांगनाओं के सम्मान में भारतीय जनता पार्टी हमेशा आगे रही है।
भारतीय सर्व कोरी समाज के संस्थापक एडवोकेट राजू देशप्रेमी,वैद्य रामनाथ ने कहा कि दिल्ली सरकार का फैसला स्वागत योग्य कदम है,इसी तरह का फैसला उत्तर प्रदेश सरकार को भी लेना चाहिए।
उत्तर प्रदेश कोरी समाज समिति की ओर से शिवप्रसाद वर्मा ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई की जयंती अन्य वीरों और वीरांगनाओं की तरह सरकारी तौर पर मनाई जानी चाहिए। 22नवम्बर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाय। सामाजिक चिंतक डा सुनील दत्त ने दिल्ली सरकार के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इसी तरह का फैसला योगी सरकार को भी लेना चाहिए। एडवोकेट सुरेश कमल ने वीरांगना झलकारी बाई के नाम से खेल पुरस्कार शुरू करने की मांग की है।
वीरांगना झलकारी बाई चेतना समिति के अध्यक्ष संजय कुमार शास्त्री ने बताया कि अमेठी जिले में 1995से वीरांगना झलकारी बाई की जयंती और बलिदान दिवस पर लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने और उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में उनकी आदमकद प्रतिमा की स्थापना की मांग लगातार की जा रही है। वीरांगना झलकारी बाई का जीवन दर्शन जूनियर हाईस्कूल की कक्षाओं के पाठ्यक्रम में आंशिक रूप से शामिल किया गया है। भारत की महान विभूतियां पुस्तक में वीरांगना झलकारी बाई पर एक पाठ होना चाहिए। अमेठी जिले के जनप्रतिनिधियों, सांसदों और विधायकों ने अभी तक हमारी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया है।
डा नंद किशोर कमल,डा हरीराम, इंजीनियर आर के सोनवानी, राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य शकुंतला भारती, भाजपा की जिला मंत्री नीलम भारती, वीरांगना झलकारी बाई कोरी जागृति मंच अमेठी के संयोजक राम संजीवन कोरी मंझवारा, कोरी समाज प्रतापगढ़ के अध्यक्ष राजाराम कोरी,राम औतार धीमान, एडवोकेट उदय प्रताप कोरी, एडवोकेट प्रमोद कुमार, राजेश कोरी, शिवराम चक्रवर्ती, डॉ प्रवीण आर्य, राजेश कोरी, डॉ राम चन्द्र सिद्धार्थ, सौरभ कमल, संतोष कुमार वर्मा, इंजीनियर बी के माहौर ,ओम प्रकाश शाक्य आदि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने और सभी स्कूलों, कालेजों में सरकारी आयोजन कराने की मांग की है ।





