मुंबई में बीएमसी द्वारा 10% पानी कटौती के बाद गंभीर जल संकट गहरा गया है, जिससे लोग पानी के लिए हाहाकार कर रहे हैं। नए नियमों और कम दबाव के कारण हाउसिंग सोसायटियां और व्यापारी पूरी तरह से वॉटर टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
मुंबई में पानी की किल्लत ने विकराल रूप ले लिया है। ऐसे में बीएमसी द्वारा पानी की सप्लाई में की गई 10 फीसदी की कटौती के बाद पूरी मुंबई में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। कई इलाकों में पानी का प्रेशर इतना कम है कि लोगों के घरों तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा है। इस संकट के कारण अब हाउसिंग सोसायटियों और व्यापारियों को पूरी तरह से वॉटर टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
नए नियमों से बढ़ी टैंकरों की डिमांड
पानी की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार और प्रशासन ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं, जिसकी वजह से टैंकरों की मांग आसमान छूने लगी है। बनाए गए नए नियमों के अनुसार बिल्डिंग बनाने (कन्स्ट्रक्शन) के कामों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है।
इसके साथ ही होटलों, मॉल्स और स्विमिंग पूलों में पानी के अंधाधुंध इस्तेमाल पर नए नियम लागू कर दिए गए हैं। ऐसे में इन कड़े नियमों के कारण अब हर बड़े काम के लिए टैंकर ही एकमात्र जरिया बचे हैं, जिससे टैंकर ऑपरेटरों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
सप्लाई नेटवर्क पर बढ़ा भारी दबाव
पानी की किल्लत के बीच मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि टैंकरों का मौजूदा नेटवर्क कम पड़ने लगा है। लोगों को एक टैंकर मंगवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और इसके दाम भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में जानकारों का कहना है कि लगातार टैंकरों के जरिए जमीन के नीचे का पानी खींचे जाने के कारण जमीन का जलस्तर भी तेजी से गिर रहा है। अगर ऐसा ही रहा, तो आने वाले दिनों में टैंकरों के लिए भी पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा।
फिलहाल, मुंबई की बड़ी हाउसिंग सोसायटियों से लेकर छोटे बिजनेस चलाने वालों के लिए ये वॉटर टैंकर ही जिंदगी की गाड़ी चलाने की आखिरी ‘लाइफलाइन’ बने हुए हैं। अगर आने वाले दिनों में कटौती वापस नहीं ली गई, तो संकट और गहरा सकता है।





