जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, शरीर उतना एक्टिव नहीं रहता और हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, शरीर उतना एक्टिव नहीं रहता और हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं। यह कमजोरी सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं है, क्योंकि इसके चलते रोजमर्रा के बहुत से काम अटक जाते हैं या बेमन से पूरे होते हैं। पर सबसे बड़ी चिंता तो यह है कि आजकल के लाइफस्टाइल में 40 और 50 की उम्र में लोग फिट रहने के बजाय लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि शरीर फुर्तीला बना रहे तो बहुत सी आदतें हैं जिन्हें अपने डेली रूटीन में अपनाना जरूरी है। ये आदतें शरीर को फिट रखने के साथ ही बीमारियों से भी
40 या 50 की उम्र के बाद खुद को फिट कैसे रखें?
40 या 50 की उम्र जिंदगी का वो बीच का पड़ाव होता है, जब शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। आइए जानते हैं इस उम्र में कैसे रखें खुद को फिट:
1. सुरक्षित एक्सरसाइज पर भरोसा
इस उम्र में जरूरी नहीं कि भारी वजन उठाकर या इंटेन्स एक्सरसाइज करके खुद को फिट रखा जाए। वॉकिंग, जॉगिंग, हल्के वजन उठाकर और बैडमिंटन जैसे स्पोर्ट्स खेलकर भी शरीर को सक्रिय रखा जा सकता है।
2. रोजाना स्ट्रेचिंग करें
शरीर में लचीलापन बना रहे, इसके लिए योग या आसान सी स्ट्रेचिंग को रूटीन में शामिल किया जा सकता है। यह आदत शरीर को लचीला और फुर्तीला बने रखने के साथ किसी भी तरह की चोट की आशंका से भी सुरक्षा करती है।
3. वजन के हिसाब से प्रोटीन इंटेक
यहां वजन के हिसाब से प्रोटीन लेने का मतलब है, एक किलोग्राम वजन पर 2 ग्राम तक प्रोटीन लेना। ऐसे में अगर व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम है तो हर दिन 70-80 ग्राम प्रोटीन शरीर की जरूरत है।
4. फाइबर की मात्रा ज्यादा लें
इस उम्र में सोल्यूबल फाइबर से रिच डाइट लेना आवश्यक माना जाता है। स्टेनफोर्ड मेडिसिन के अनुसार, सोल्यूबल फाइबर जैसे- चने, छोले, बीन्स, मटर, नट्स, सीड्स, रसदार फल, हरी-पत्तेदार सब्जियां वजन कंट्रोल करने के साथ डायबीटीज, ब्लड प्रेशर को भी मेंटेन करने में मददगार हैं।
5. कोर को मजबूत रखें
कोर की मजबूती कमर दर्द जैसी समस्याओं से बढ़ती उम्र में छुटकारा दिला सकती है। इसके लिए एक्सरसाइज में प्लैंक, क्रंचेज और ब्रिज जैसी एक्सरसाइज को शामिल किया जा सकता है।
6. पैरों को मजबूती दें
शरीर का संतुलन ठीक तरह से बना रहे, इसके लिए पैरों की मजबूती बेहद मायने रखती है। ट्रेडमिल या पार्क में वॉकिंग, स्टेशनरी बाइक एक्सरसाइज, स्क्वाट को रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है।





