HomeUttar PradeshLalitpurसूर्य नमस्कार के साथ सीतापाठ पर लगा परंपरागत मेला

सूर्य नमस्कार के साथ सीतापाठ पर लगा परंपरागत मेला

अवधनामा संवाददाता

हजारों का सैलाब उमड़ा मेले में, पुलिस ने किये सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम

ललितपुर। मकर संक्रान्ति के पावन पर्व पर रविवार को नगर के हृदय स्थल गोविंद सागर बाँध पर परंपरागत तरीके से अगाध श्रद्धा के साथ मनाया गया। लोगों द्वारा सुबह से ही शुभ मुहूर्त में नदी, तालाबों, पोखरों में जाकर स्नान किया गया और भगवान की आराधना की गयी। वहीं तिल का दान किया गया, जगह-जगह खिचड़ी का वितरण भी किया गया। मकर संक्रान्ति के पर्व गोविंदसागर बांध की तलहटी में स्थित सीतापाठ के धार्मिक स्थल पर मेले का आयोजन किया गया।
इस दौरान सीतापाठ मंदिर पर स्थित माता सीता मंदिर, बालाजी सरकार समेत हजारिया महादेव का अभिनव श्रृंगार किया गया तो वहीं यहां पर हजारों लोगों ने पहुंच कर गोविंदसागर बांध व सीतापाठ जलाशय में स्नान कर सूर्यनमस्कार किया। तो वहीं लोगों ने मंदिर पर प्रसाद चढ़ाया व खिचड़ी का वितरण किया गया। इधर रणछोर में भी महायज्ञ प्रारम्भ हो गया। इस दौरान मेला भी लगा। मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सभी धार्मिक क्रियायें मन्दिर के महन्त की देखरेख में सम्पन्न हुईं। कस्बा राजघाट में मकर संक्रान्ति पर्व पर मेला लगा। जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। ब्रह्मलीन हुये सीतापाठ धाम के महन्त अमावशगिरी महाराज की समाधि स्थल पर भी लोगों ने पूजन-अर्चन किया। इस दौरान सीतापाठ के महन्त कृष्णागिरी महाराज ने कहा कि भूखों को भोजन अन्नदान रोगी को औषधि दान करने से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि नगरवासी अपने कारण से जनपद सदैव ही प्राकृतिक आपदाओं एवं धार्मिक उन्माद, दंगा आदि से बुराईयों से बचा रहता है तथा यज्ञ अनवरत रहते हैं। इस अवसर अनेकों श्रृद्धालुगण मौजूद रहे।
दुकानों पर खरीददारी के लिए उमड़ी भीड़
गोविन्द सागर बांध की तलहटी में सीतापाठ मंदिर के विशाल प्रांगण में लगे वार्षिक मेले में सजायी गयी दुकानों से खरीददारी करने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से लेकर शाम तक खिलौना, मिट्टी व लोहे के वर्तन, लकड़ी से बनी सामग्री इत्यादि की जमकर खरीददारी हुयी। इस बार मेले में लोगों को पुरानी यादें ताजा कर दीं।
बच्चों के लिए झूले, चाऊमीन खूब भायी
मेला परिसर में बच्चों को आकर्षित करने के लिए मिक्की माऊस, जम्पिंग पैड, घोड़ा, कार इत्यादि के झूले लगाये गये थे। इन झूलों में शहर व ग्रामीण अंचलों से आये बच्चों ने खूब आनंद लिया। वहीं दूसरी ओर बच्चों को खाने-पीने के लिए चाऊमीन, डोसा, इडली, पाव भाजी, चाट-पकौड़ी और पानी बतासे की खूब बिकवाली हुयी।

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