HomeUttar PradeshLalitpurराजवैद्य पं. सिद्धि सागर को जन्मदिन पर किया याद

राजवैद्य पं. सिद्धि सागर को जन्मदिन पर किया याद

अवधनामा संवाददाता

ललितपुर। सिद्धि समूह के यशस्वी संस्थापक स्व. राजवैद्य पं. सिद्धि सागर जैन प्राणाचार्य के जन्मोत्सव पर उन्हें यादकर भावभीनें श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये। आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्राणाचार्य के कार्यो को याद करते हुये कहा कि पं. सिद्धि सागर ने मड़ावरा क्षेत्र से ललितपुर आकर आयुर्वेद के ज्ञान का असहाय एवं गरीब लोगों की नि:शुल्क चिकित्सा के माध्यम से कार्य शुरू किया। उन्होनें उसी समय सिद्धि नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया। उनके द्वारा धार्मिक कार्यो में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया गया। देश के अनेक स्थानों पर वेदी प्रतिष्ठा एवं पंच कल्याणक व गजरथ महोत्सव संपन्न करायें। इस अवसर पर सिद्धि समूह के चैयर मैन व दैनिक जनप्रिय के प्रधान संपादक भूपेन्द्र जैन ने राजवैद्य के आदर्शो एवं जनसेवा के बारे में प्रकाश डालते हुये, कहा कि पंडितजी सिद्विसागर ने अपना पूरा जीवन आयुर्वेद के उत्थान एवं खोजपूर्ण कार्यो के लिये समर्पित किया। उन्होंने बताया कि स्व.सिद्धि सागर के व्यक्तिव की सबसे बड़ी विशेषता थी, कि जो उन्होंने प्रण कर लिया वह उसे पूरा करके मानते थे, उनका मानना था कि किसी भी कार्य में सफलता तभी हासिल हो सकती है, जब आप व्यापार में लोगों का नैतिक भरोसा जीत सकें। डा. हुकुमचन्द्र पवैया ने कहा कि पंडि़तजी ने जनसेवा एवं धार्मिक क्षेत्र में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनके द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक कार्यो को कुशलतापूर्वक सम्पादित कराया गया, जिसके कारण विद्वानों के बीच उन्हें पंडित की उपाधि प्रदान की गई। आयुर्वेद में शोध के कारण उन्हें राजवैद्य एवं प्राणाचार्य की उपाधि से विभूषित किया गया। उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में विद्वानों के सम्मेलन आयोजित किये। जनसेवा के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क चलित औषाधालय संचालित किये, जिससे क्षेत्र के लोगों में आयुर्वेद के प्रति रूचि जागृत हुई। इस दौरान सिद्धि सागर एकेडमी डायरेक्टर रीता जैन, डॉ सुषमा जैन, प्रबंध सम्पादक विपुल जैन, डॉ.अलोक जैन, अंकिता जैन, बेबी सरगम जैन के अलावा शिक्षक स्टाफ एवं पत्रकार विनीत चतुर्वेदी, प्रकाश नारायण पाण्डे, सुरेन्द्र सिंह, रज्जन चतुर्वेदी, महेन्द्र पाठक, अरविन्दर सिंह, भगवत शुक्ला, इसरार खांन, पुष्पेन्द्र, बृन्द्रावन, अजीत, मूलचन्द, वीरेन्द्र, मुरली के अलावा संस्थान से जुड़े अनेकों लोग मौजूद रहे।

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