गाजीपुर । नगर के दयानंद एंग्लो वैदिक डी.ए.वी. इंटर कॉलेज के सभागार में उपन्यास सम्राट प्रेमचंद और नवगीतकार डॉ उमाशंकर तिवारी की जयंती मनाई गई। विद्यालय के शिक्षक डॉ संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद को उपन्यास -सम्राट कहा जाता है। उन्होंने सेवासदन, निर्मला ,रंगभूमि कर्मभूमि ,प्रेमाश्रम ,गोदान ,गबन, मंगलसूत्र जैसे कालजई उपन्यास लिखे। जिसमें जनता की आम आदमी की मूल समस्याओं का वर्णन किया गया। डॉ उमाशंकर तिवारी एक श्रेष्ठ नवगीतकार थे । उन्होंने’ जलते शहर में” धूप कड़ी है’ तोहफे कांच घर के’ और ‘असहमत समय’ नाम से चार नवगीत संकलन लिखे। उन्होंने नवगीत -दशक चार का संपादन भी किया। गीत- काव्य पर उनका शोध प्रबंध है। अंग्रेजी के प्रवक्ता आशुतोष कुमार मिश्रा ने कहा कि साहित्य और ‘कला जीवन के लिए’ और ‘कला कला के लिए ‘दो माध्यमों से लिखा जाता है । जिन साहित्यकारों में इनका संतुलन स्थापित होता है।
वह श्रेष्ठ साहित्य का सृजन करते हैं । वरिष्ठ लिपिक संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि साहित्यकार को सच कहने का साहस होना चाहिए नहीं तो वह चारण कहा जाता है। हिंदी के प्रवक्ता शैलेश कुमार ओझा ने प्रेमचंद को श्रेष्ठ कहानीकार बताया और उनकी कहानी ईदगाह ,मंत्र और पूस की रात को कालजई रचनाएं बताया। प्रधानाचार्य हरिशंकर ने कहा कि बदलते समय मे समाज में नवता का विचार ही टिकता है । जो पुराना जीर्ण -शीर्ण हो गया है उसको छोड़कर ही आगे बढ़ा जा सकता है ,नवगीत उस कमी को पूरा करता है । कार्यक्रम के अध्यक्ष विद्यालय के प्रबंधक आदित्य प्रकाश ने कहा आज हमारे विद्यालय में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आप सभी ने बेहद प्रभावशाली विचार रखे। कई वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य पर गहरा प्रकाश डाला है। मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूँ। महर्षि दयानंद सरस्वती के सामाजिक सुधारों, पाखंड-विरोध और ‘वेदों की ओर लौटें’ के नारे ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन और लेखन को गहराई से प्रभावित किया था। ठीक उसी प्रकार प्रेमचंद के प्रगतिशील विचारों का प्रभाव आज हम सभी के जीवन पर पड़ना चाहिए।





