Wednesday, April 15, 2026
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‘महिलाओं का आरक्षण नहीं, असली मुद्दा तो परिसीमन है’; सोनिया गांधी का केंद्र सरकार पर निशाना

सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की परिसीमन प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक और संविधान विरोधी बताया है। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार मनमानी कर रही है।

कांग्रेस संसदीय दल की (CPP) अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा में सीटों के परिसीमन (Delimitation) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोनिया गांधी ने सरकार के इस कदम को अलोकतांत्रिक और संविधान के खिलाफ बताया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन लाने के समय पर सवाल उठाया।

‘द हिंदू’ में लिखे एक लेख में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन की आड़ में मनमानी कर रहे हैं और विपक्ष की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग को लगातार ठुकराया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले विशेष सत्र के बजाय, इन संशोधनों को मानसून सत्र में लाया जाए ताकि उचित चर्चा हो सके।

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्ष लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला सांसदों के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के विचार के खिलाफ नहीं है, वह 2027 की जनगणना से पहले परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ है।

सोनिया गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि अनौपचारिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर परिसीमन करना बेहद खतरनाक होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन करने वाला विधेयक 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले विशेष सत्र के बजाय, इन संशोधनों को मानसून सत्र में लाया जाए ताकि उचित चर्चा हो सके।

कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा…

सोनिया गांधी ने लिखा, “संसद का मानसून सत्र जुलाई के मध्य में शुरू होगा। अगर सरकार 29 अप्रैल (पश्चिम बंगाल में मतदान के बाद) के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर विपक्ष के साथ अपने प्रस्तावों पर चर्चा करे, जिससे सार्वजनिक बहस के लिए समय मिल सके, और फिर मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयकों पर विचार करे, तो इससे कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा।

असली मुद्दा तो परिसीमन है…

मुश्किल समय में माहौल को संभालने के अलावा, हमारी राजनैतिक व्यवस्था में इतने बड़े बदलावों को जल्दबाजी में थोपने का कोई औचित्य नहीं है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से दोषपूर्ण और अलोकतांत्रिक है। यहां महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा नहीं है। वह तो पहले ही तय हो चुका है। असली मुद्दा परिसीमन है, जो अनौपचारिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर, बेहद खतरनाक है और खुद संविधान पर एक हमला है।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने X पर लिखा, “कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष, सोनिया गांधी का कहना है कि मोदी सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने का असली कारण महिलाओं का आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन और जाति जनगणना में देरी व उसे पटरी से उतारना है।”

परिसीमन को लेकर विवाद

गौरतलब है कि सरकार ने दो बड़े संशोधनों की योजना बनाई है। पहला नारी शक्ति वंदन अधिनियम दूसरा जनगणना और परिसीमन जनगणना में देरी के कारण, अब 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ने की योजना है। संशोधन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो सकती है। जिसे विपक्ष जनगणना और जातिगत आंकड़ों से जोड़कर देख रहा है।

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