Friday, February 13, 2026
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युजीसी बिल 2026 के संशोधन के विरोध एवं पुनर्विचार के लिए ब्रहाम्ण समाज ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा

महोबा। भगवान परशुराम सेवा समिति महोबा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गुरूवार को युजीसी बिल 2026 के संशोधन के विरोध एवं पुनर्विचार के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी गजल भारद्वाज को सौंपा। ज्ञापन में ब्रहाम्ण समाज ने भारत सरकार एवं संबन्धि मंत्रालय का ध्यान यूसीजी बिल 2026 के संशोधनों की ओर आकर्षित कराया है, जिसमें समान्य वर्ग के छात्र और शिक्षा जगत के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है।

राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में बताया कि प्रस्तावित संशोधनों में योग्यता की अनदेखी कर कुछ विशिष्ट प्रावधान किए जा रहे है, जो प्रतिभावान छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अकादमिक स्वायत्ता बिल के कुछ अंश उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्ता को प्रभावित करते हैं, जिससे शिक्षा स्तर में गिरावट आने की संभावना हैं। बिना विचार विमर्श के लागू किए जा रहे ये बदलाव समाज के एक बड़े वर्ग में असुरक्षा और असंतोष की भावना पैदा कर रहे हैं।

ज्ञापन में बताया कि सवर्ण समाज की इन संस्थाओं को सरकार और शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचाए जाने और बिल पर व्यापक चर्चा कर सुधार किए जाने की मांग की है, जिससे छात्रों के बीच में भेदभाव की स्थिति पैदा न हो सके। ज्ञापन देने वालों में देवेंद्र सुल्लेरे, कृष्ण कुमार शुक्ला, अजय दीक्षित, आदर्श तिवारी, विकास शुक्ला, अनुज महाराज, जितेंद्र द्विवेदी, मनोज शुक्ला, योगेश कुमार गुप्ता, सुरेंद्र कुमार तिवारी, हिमांशु तिवारी सहित तमाम समिति के सदस्य शामिल रहे।

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