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कुर्सी से चिपके रहने से हो सकता है सूजन, मोटापा और कैंसर! डॉक्टर से बताया ऑफिस में कैसे रखें खुद को एक्टिव

सुबह जिम में पसीना बहाना या रोजाना सुबह टहलना अच्छी आदत है, लेकिन अगर दिन के बाकी 8-10 घंटे कुर्सी पर बैठे-बैठे गुजरते हैं तो यह आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

आज की कारपोरेट लाइफस्टाइल में कुछ लोग नियमित एक्सरसाइज तो करते हैं, लेकिन वे दिनभर लगातार बैठे भी रहते हैं। केवल 45-60 मिनट की एक्सरसाइज पूरे दिन की निष्क्रियता की भरपाई नहीं कर सकती।

डॉ. अंशुमान कुमार (प्रिंसिपल डायरेक्टर, सर्जिकल आन्कोलाजी, मैक्स अस्पताल, दिल्ली) बताते हैं कि शरीर को पूरे दिन नियमित अंतराल पर सक्रिय रखना उतना ही जरूरी है। हाल ही में पीएलओएस मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि लगातार लंबे समय तक बैठे रहने वालों को कैंसर का जोखिम सक्रिय रहने वाले के बनिस्पत अधिक रहता है।

दरअसल, लगातार बैठ रहने से आरामदेह मुद्रा में रहने के चलते शरीर के मेटाबालिज्म को धीमा हो जाता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस, क्रोनिक इन्फ्लेमेशन और मोटापे जैसी समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। उक्त अध्ययन में 91 हजार से अधिक लोगों के 12 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

कैसे प्रभावित होता है मेटाबालिज्म?

जब व्यक्ति लंबे समय तक लगातार बैठा रहता है तो मांसपेशियों की गतिविधियां काफी कम हो जाती हैं। इससे शरीर की कैलोरी खर्च करने की क्षमता घटती है और शरीर ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप मेटाबालिज्म धीमा पड़ने लगता है और अतिरिक्त ऊर्जा शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है।

क्यों बढ़ता है इंसुलिन रेजिस्टेंस?

आरामदेह मुद्रा में बैठे रहने से शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। ऐसे में ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए अग्नाशय को अधिक इंसुलिन बनानी पड़ती है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। यही बदलाव आगे चलकर कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकते हैं।

क्रोनिक सूजन भी बनती है वजह

लगातार बैठे रहने से शरीर में लो-ग्रेड क्रोनिक इन्फ्लेमेशन विकसित हो सकती है। यह सूजन बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन लंबे समय तक रहने पर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। मोटापा, हार्मोनल असंतुलन और लगातार बनी रहने वाली सूजन कई प्रकार के कैंसर के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकती है।

सिर्फ जिम नहीं, बीच-बीच में उठना भी जरूरी

यदि आफिस में हैं तो फोन पर बात करते समय खड़े होकर चलें, सीढ़ियों का उपयोग करें और पानी लेने के लिए खुद उठकर जाएं। अध्ययन में भी पाया गया कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की बजाय हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि करने से जोखिम कम हो सकता है। स्वस्थ जीवनशैली का मतलब केवल जिम जाना नहीं है, बल्कि पूरे दिन शरीर को सक्रिय रखना होता है। छोटी-छोटी गतिविधियां भी लंबे समय में मेटाबोलिज्म को बेहतर बनाए रखने, इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने और कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इन आसान उपायों से कम करें जोखिम

  • हर 30-45 मिनट में कुर्सी से उठकर दो से पांच मिनट के लिए उठकर टहलें या स्ट्रेचिंग करें।
  • प्रतिदिन कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम करना चाहिए।
  • आफिस में लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करना शरीर को सक्रिय रखने का एक बेहतर उपाय है।
  • स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए और घर में भी लंबे समय तक लगातार बैठने से बचना चाहिए।
  • वजन को नियंत्रित रखना आवश्यक है। स्वस्थ और संतुलित आहार के प्रति जागरूक होना आवश्यक है।
  • हर दिन पर्याप्त और सही नींद लेना जरूरी है। साथ ही तनाव को नियंत्रण में रखने का अभ्यास करना चाहिए।
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