लखनऊ में एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है, जहां रात में काम होता था और ठगी के पैसे अमेरिका, रूस व चीन से हवाला के जरिए भारत आते थे।
लखनऊ। समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर सब कुछ सामान्य दिखाई देता था। दिन में दफ्तर लगभग शांत रहता, लेकिन रात होते ही यहां सैकड़ों फोन एक साथ बजने लगते थे। विदेशी लहजे में बातचीत होती और कंप्यूटर स्क्रीन पर हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों का डाटा खुलता।
सुबह होने तक काम खत्म हो जाता और कर्मचारी अपने-अपने फ्लैटों की ओर लौट जाते। इसी वजह से लंबे समय तक किसी को इस बात का अंदाजा नहीं हुआ। यही नहीं, रकम अमेरिका से रूस और चाइना होते हुए हवाला के जरिए भारत पहुंचती थी।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड अहमदाबाद का रहने वाला विनीत शर्मा है, जो एक प्रतिष्ठित कारोबारी है। सूत्रों के मुताबिक, विनीत की कंपनी ‘सोलारिस साल्यूशन’ की नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। उसके साथ कई अन्य साझेदार भी इस कारोबार में जुड़े हुए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि ठगी से हासिल रकम सीधे बैंकिंग चैनल से नहीं लाई जाती थी।
बदलवाते थे गिफ्ट कूपन
अमेरिका में बैठे नेटवर्क के सहयोगी ठगी की रकम को गिफ्ट कूपन में बदलवाते थे। इसके बाद यह गिफ्ट कूपन रूस भेजे जाते थे। वहां से रकम चीन पहुंचती और फिर हवाला नेटवर्क के जरिए भारत लाई जाती थी। इसके बाद विनीत शर्मा और उसके सहयोगी रकम का बंटवारा करते थे।
इस तरह की लेयरिंग के कारण पैसों के स्रोत तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है। लेनदेन कई देशों और कई माध्यमों से होकर गुजरता है, इसलिए प्रत्येक कड़ी की पुष्टि करने में लंबा समय लग सकता है। प्रारंभिक जांच में नेटवर्क के तार अहमदाबाद, महाराष्ट्र, गोवा समेत पांच राज्यों से जुड़े मिले हैं। काल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को पता था कि वे वैध ग्राहक सेवा नहीं बल्कि साइबर ठगी के नेटवर्क का हिस्सा हैं।
रात के समय संचालन होने के कारण गतिविधियां सामान्य काल सेंटर जैसी ही प्रतीत होती थीं और इसी वजह से लंबे समय तक किसी को संदेह नहीं हुआ। छापेमारी के दौरान संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था बबलू कुमार, डीआइजी साइबर क्राइम, विभूतिखंड थाना पुलिस, साइबर सेल और अन्य थानों का पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
बिल्डिंग मालिक से होगी पूछताछ
आफिस किराए पर देने वाले बिल्डिंग बिल्डिंग मालिक से भी पूछताछ की जाएगी, ताकि कार्यालय किराये पर देने से पहले सत्यापन कराया गया था या नहीं। वहीं, बरामद डाटा की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि अब तक इस गिरोह ने कितने लोगों को शिकार बनाया है। परिसर में पुलिस चौकी बनी है। प्रतिदिन पुलिसकर्मी तैनात रहने के बाद भी उन्हें शक नहीं हुआ। सभी लड़कियों के लिए कैब लगी थी, ताकि किसी को कोई शक न हो।





