Tuesday, February 24, 2026
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‘पुराने मंदिरों के हिस्सों का इस्तेमाल करके बनाई गई’, कमाल मौला मस्जिद को लेकर ASI का बड़ा दावा

भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) ने भोजशाला कॉम्प्लेक्स स्थित कमाल मौला मस्जिद पर बड़ा दावा किया है। ASI की रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद पुराने मंदिरों के हिस्सों का उपयोग करके बनाई गई थी।

मध्य प्रदेश के भोजशाला कॉम्प्लेक्स में बनी कमाल मौला मस्जिद को लेकर भारतीय पुरातत्व विभाग ने बड़ा दावा किया है। पुरातत्व विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला है कि कमाल मौला मस्जिद को पुराने मंदिरों के हिस्सों का इस्तेमाल करके बनाया गया।

आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने यह नतीजा साइंटिफिक जांच, सर्वे और खुदाई, मिली चीजों की स्टडी और एनालिसिस, आर्किटेक्चरल अवशेषों, शिलालेखों, कला और मूर्तियों की स्टडी पर आधारित है। 2024 में एमपी हाई कोर्ट की इंदौर बेंच को सौंपी गई एएसआई रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्ट्रक्चर सदियों बाद बनाया गया था, जिसमें “सिमिट्री, डिजाइन या यूनिफॉर्मिटी पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।”

16 मार्च को होगी मामले की सुनवाई

सोमवार को बेंच ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि एएसआई रिपोर्ट सभी पार्टियों को दी जाए। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने सभी पार्टियों को दो हफ्ते में आपत्तियां, सुझाव और राय दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है।

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के राज्य उपाध्यक्ष और मामले में याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा, “एएसआई के सर्वे और जो रिपोर्ट सामने आई है, उससे पता चला है कि पूरा ढांची परमार वंश का है। इसे राजा भोज और उनके पूर्वजों ने बनवाया था। यह ढांचा लगभग 950 से 1000 साल पुराना है।”

एक और याचिकाकर्ता अशोक जैन ने कहा, “हमने यह कहते हुए याचिका दायर की थी कि अगर वह जगह मस्जिद थी तो उन्हें (मुसलमानों को) दे दी जाए और अगर वह मंदिर है तो वह हमें मिल जाए। अब कोर्ट ने सभी को जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। अगली सुनवाई के बाद हम सही कदम उठाएंगे।”

किसने तैयार की रिपोर्ट

2,000 पन्नों की यह रिपोर्ट एएसआई के एडिशनल डायरेक्टर जनरल आलोक त्रिपाठी ने तैयार की थी, जिसमें ज़ुल्फिकार अली, भुवन विक्रम, गौतमी भट्टाचार्य, मनोज कुमार कुर्मी, इजहार आलम हाशमी, आफताब हुसैन, शंभू नाथ यादव और नीरज कुमार मिश्रा ने सहयोग किया था।

रिपोर्ट में क्या निकला?

टीम ने 98 दिन के सर्वे के दौरान खुदाई, स्टडी और नतीजों को लिस्ट करने के लिए लेटेस्ट साइंटिफिक टेक्नीक का इस्तेमाल किया और इशारा किया कि यह देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर हो सकता है।

एएसआई को कुल 94 मूर्तियां और मूर्तियों के टुकड़े मिले, जिनमें से कई छेनी से खोदी हुई थीं या खराब हो गई थीं। मौजूदा स्ट्रक्चर में इस्तेमाल खिड़कियों, खंभों और बीम पर चार भुजाओं वाले देवताओं की मूर्तियां बनी हुई थीं। इन पर बनी तस्वीरों में गणेश, ब्रह्मा और उनकी पत्नियां, नरसिंह, भैरव, देवी-देवता, इंसान और जानवरों की आकृतियां शामिल थीं।

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