मूडीज़ रेटिंग्स ने भारत को 2020 के बाद से सबसे लचीली बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीतियों के कारण भारत वैश्विक झटकों का सामना करने में बेहतर स्थिति में है।
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज़ रेटिंग्स’ (Moody’s Ratings) ने भारत की ग्रोथ व अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी बात कही है। मूडीज ने कहा कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर नीतिगत ढांचे और मजबूत घरेलू पूंजी बाजारों के समर्थन से भारत 2020 के बाद से सबसे लचीले बड़े उभरते बाजार अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभरा है। दुनिया की उभरते मार्केट और इकोनॉमी पर अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में मूडीज ने कहा है कि मजबूत वित्तीय सुरक्षा और पूर्वानुमानित बेहतर आर्थिक नीतिगत वातावरण के कारण भारत भविष्य के वैश्विक झटकों का सामना करने के लिए अपने कई समकक्ष उभरते बाजारों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
मूडीज़ की इस स्टडी (Moody’s Study) में इंडोनेशिया, मैक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, तुर्की और अर्जेंटीना सहित प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया और 2020 से लेकर अब तक की कई वैश्विक संकटकालीन घटनाओं में उनके प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया है।
कौन है मूडीज?
मूडीज़ रेटिंग्स,अमेरिका स्थित तीन प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में से एक है, जो कॉरपोरेट, सरकारी और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के लिए बांड और रेटिंग संबंधी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अनुसंधान सेवाएं प्रदान करती है।
मूडीज ने कहा, “घरेलू वित्तपोषण पर भारत की निर्भरता मजबूत स्थानीय बाजारों और पर्याप्त भंडार से संतुलित है… फिर भी, भारत का अपेक्षाकृत हायर डेट वेटेज (कर्ज का भार) और कमजोर राजकोषीय संतुलन लगातार आने वाले झटकों से निपटने के लिए उपलब्ध गुंजाइश को सीमित करते हैं।”
‘ग्लोबल झटकों से उभरने में सक्षम भारत’
मूडीज ने कहा कि भारत भविष्य में होने वाली बाहरी अस्थिरता से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है क्योंकि इसकी मॉनेटरी पॉलिसी का फ्रेमवर्क, स्पष्ट और पूर्वानुमान योग्य है, महंगाई को लेकर की उम्मीदें स्थिर हैं और एक्सचेंज रेट को जरुरत पड़ने पर समायोजित करने की अनुमति है। मूडीज़ ने कहा कि भारत, भविष्य में ग्लोबल क्राइसिस के किसी भी दौर में मजबूत और बेहतर सुरक्षा उपायों के साथ प्रवेश करेगा, जिससे अत्यधिक अनिश्चितता के दौर में भी भारत के बाजारों को लेकर निवेशकों का विश्वास बना रहेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले पांच वर्षों में वैश्विक स्तर पर कई व्यवधानों को बिना वित्तपोषण लागत में तीव्र वृद्धि या पूंजी बाजारों तक पहुंच खोए झेलने में सफलता प्राप्त की है, जो मजबूत नीतिगत ढांचे और बेहतर व्यापक आर्थिक लचीलेपन को दर्शाता है।





