Wednesday, April 22, 2026
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लालची दामाद ने रूपयों के लिए सास को उतारा था मौत के घाट

अवधनामा संवाददाता

एक पखवारे पहले दिया था घटना को अंजाम

‘बांदा। एक पखवारा पहले महिला का अधजला शव कनवारा गांव के समीप जंगल में पड़ा पाया गया था। पुलिस का मानना था कि उसकी हत्या की गई है। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे घरवालों ने उसकी शिनाख्त भी की थी। पुलिस ने गुरुवार को इसका खुलासा कर दिया। दामाद ने अपने दो अन्य साथियों के साथ रुपए, नौकरी और जमीन की लालच में उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी थी। शव को बोरी में भरकर फेंक दिया गया था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर मृतका का कीपैड मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया।
शहर के शांती नगर मुहल्ला निवासी ऊषा देवी (52) पत्नी चुन्ना प्रजापति सफाई कर्मचारी थी। वह 29 जनवरी को अचानक लापता हो गई। उसकी खोजबीन की गई, लेकिन पता नहीं चला। चार फरवरी की दोपहर उसका अधजला शव कनवारा के जंगल से बरामद किया गया। तब तक महिला का शव अज्ञात में था। सूचना पाकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंची बेटी विनीता और पति चुन्ना ने उसकी चूड़ी और गले में पड़े माला से शिनाख्त की थी, लेकिन बड़ी बेटी अनीता शव की पहचान करने से मना कर रही थी। इस संशय में पुलिस ने विरोधाभास की स्थिति को देखते हुए पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को फ्रीजर में ही रखवा लिया था। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुटी रही। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन के निर्देश पर एसओजी और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम घटना का खुलासा करने में जुटी हुई थी। गुरुवार की दोपहर पुलिस ने चेकिंग के दौरान मृतका के दामाद संतोष प्रजापति पुत्र रामसनेही निवासी मढ़ियानाका को गिरफ्तार कर लिया। कड़ाई से पूछतांछ की गई तो उसने पूरा राज उगल दिया। संतोष के साथ मौजूद शत्रुघन उर्फ बुच्ची पुत्र सुंदरलाल निवासी नासी शाहपुर बदौसा, अतुल पुत्र रामकिशोर निवासी लामा देहात कोतवाली को गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर मृतका का कीपैड मोबाइल फोन मेडिकल कालेज के पास से बरामद कर लिया। घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल को भी कब्जे में ले लिया। अपर पुलिस अधीक्षक लक्ष्मी निवास मिश्र ने बताया कि मृतका के दो बेटी हैं। बड़ी बेटी अनीता और छोटी बेटी विनीता है। अनीता ने अपने पहले पति को छोड़कर दूसरे पति संतोष निवासी मढ़ियानाका से शादी कर ली थी। इसी बात से नाराज होकर ऊषा देवी अपनी छोटी बेटी विनीता के साथ रहने लगी। उसने विनीता के नाम एक प्लाट खरीदा था। यह प्लाट अनीता को नागवार गुजरा। किसी तरह अनीता ने अपनी मां को बहला फुसलाकर शांती नगर वाले मकान में बुलाकर रख लिया। ऊषा ने अपना मकान बड़ी बेटी अनीता के नाम कर दिया। बड़ी बेटी अनीता और उसका पति संतोष विनीता का प्लाट और बैंक में रखे पूरे रुपए की मांग कर रहे थे। महिला का दामाद नौकरी और पैसों की लालच में आ गया। उसने अपने दो अन्य साथियों के साथ हत्या करने की योजना बनाई। उसने दोनो साथियों को 25 हजार रुपए भी दिए थे। 29 जनवरी को तीनो लोगों ने मिलकर महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी और शव को बोरी में भरकर मोटरसाइकिल में रखकर कनवारा के समीप झाड़ियों में फेंक आए थे। दो दिन बाद पहचान छिपाने के लिए डीजल डालकर शव को जला दिया गया था। पुलिस टीम में कोतवाली प्रभारी श्यामबाबू शुक्ला, एसओजी प्रभारी राकेश कुमार तिवारी, उप निरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी, हेड कांस्टेबल अश्विनी प्रसाद, भूपेंद्र सिंह, नीतेश समाधिया, कांस्टेबल भानुप्रताप, ललित, सूर्यांशु, वीरेंद्र यादव, अमित कुशवाहा आदि मौजूद रहे।

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