Thursday, May 21, 2026
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8 घंटे सोने के बाद भी दिनभर छाई रहती है सुस्ती? जान लें कहीं आप ‘समर फटीग’ के शिकार तो नहीं

देश के कई इलाकों में भीषण गर्मी और गर्म हवाओं के चलते जन-जीवन प्रभावित होने लगा है। कुछ लोग इन दिनों हरदम थकान या सुस्ती महसूस करने की शिकायत करते हैं।

धूप से बचने के उपाय ढूंढना, एसी कमरों की तरफ भागना, ठंडी चीजों का सेवन करने की इच्छा इन दिनों बहुत सामान्य आदत बन जाती है। क्या इसके बाद भी आप बेचैन बने रहते हैं?

अगर घंटों की नींद के बाद भी थकान व सुस्ती महसूस होती है और आप इसका कारण रात को कुछ भारी खा लेने या नींद न पूरी होने को मान रहे हैं तो इसमें एक अन्य कारण समर फटीग भी जोड़ सकते हैं।

इसे चिकित्सकीय भाषा में हीट एक्जाशन भी कहा जाता है। बता दें कि समर फटीग एक संकेत है जिससे पता चलता है कि आपके शरीर को बढ़े हुए तापमान में समायोजित होने में कठिनाई महसूस हो रही है। ऐसे में समर फटीग से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है कि आप इसके लक्षणों को पहचानें। ऐसे उपाय करें ताकि हीटवेव और बढ़े हुए तापमान में आपकी ऊर्जा बनी रहे।

एसी न बन जाए समस्या

अगर एसी का प्रयोग करते हैं तो 24 से 25 डिग्री सेल्सियस का तापमान आमतौर पर सबसे आरामदायक और आदर्श इनडोर तापमान माना जाता है। यह न तो बहुत अधिक गर्म होता है और न ही ठंडा। बाहर का तापमान अधिक होने के बाद लोग अक्सर एसी का तापमान बहुत कम कर देते हैं। तापमान का अंतर अधिक रहेगा तो इससे डिहाड्रेशन, उनींदापन, कमजोरी थकान भी महसूस हो सकती है।

दवा या चाय नहीं है समाधान

यदि इस मौसम में अधिक कमजोरी या थकान हो रही है तो बिना डाक्टर की सलाह के कोई सप्लीमेंट जैसे मल्टीविटामिन, पेन किलर या एनर्जी पिल्स लेने से बचना चाहिए। ध्यान रहे इससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है या किडनी पर भी इसका बुरा असर हो सकता है। इसी तरह, चाय-काफी या कोल्ड ड्रिंक या अल्कोहल का सेवन भी इस समस्या का समाधान नहीं है। इनसे भी थकान व डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है।

रात को भी रहें सावधान

आमतौर पर रात का तापमान कम होने से राहत मिलती है, पर जब गर्मी के दिनों में रात के तापमान में भी कमी नहीं आती, तो इससे हीट एक्जाशन के साथ शरीर के कई अंगों पर दुष्प्रभाव पैदा करता है। किडनी की समस्या, श्वसन तंत्र पर दबाव व ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

नींद न आने या बार-बार खुलने से शारीरिक व मानसिक थकान हावी रहती है। यह प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर डालता है। इसलिए इस मौसम में सोने से पूर्व व उठने के बाद पर्याप्त पानी व ओआरएस का प्रयोग करें। छत पर सोने से बचें। पहली मंजिल के मकान में रहते हैं कमरे का तापमान ठंडा करने के उपाय करें। रात के भोजन में भारी खाना खाने से बचें। ये शरीर के भीतरी तापमान को बढ़ा सकते हैं।

इन संकेतों को जानें

  • बालों को पहले की तुलना अधिक गिरना
  • सामान्य से अधिक प्यास महसूस होना।
  • खड़े होने पर चक्कर आना या अस्थिर महसूस होना
  • सीढ़ियां चढ़ना अपेक्षाकृत कठिन होना
  • आठ घंटे की नींद के बाद भी सुबह उठने में संघर्ष करना
  • कसरत करने के बाद अच्छा महसूस न होना
  • भूख न लगना, हर वक्त बीमार या कमजोरी महसूस होना
  • सिर दर्द बना रहना
  • कोई निर्णय लेने में कठिनाई महसूस होना आदि।

समर फटीग व हीट स्ट्रोक में अंतर

गर्मी के मौसम में कमजोरी और थकान महसूस होने से शरीर के तापमान में बढ़ोतरी अधिक नहीं होती। पसीना भी अधिक आता है, पर हीट स्ट्रोक एक आपातकाल है जिससे शरीर का तापमान बहुत अधिक हो जाता है और पसीना आना भी बंद हो जाता है।

दरअसल, हीट स्ट्रोक में शरीर के तापमान को नियंत्रण करने वाली स्वाभाविक प्रणाली फेल हो जाती है। हीट स्ट्रोक होने पर तुरंत अस्तपाल ले जाने की स्थिति होती है जबकि समर फटीग में व्यक्ति को छांव में या शीतल जगह पर ले जाकर उपचार करें तो वह ठीक हो जाता है।

“बढ़ते तापमान के कारण शरीर का सामान्य तापमान भी बढ़ने लगता है। हमारा शरीर उस गर्मी को तुरंत नियंत्रित करने का प्रयास करता है। इस प्रक्रिया में कई प्रकार के लक्षण उभरते हैं। अत्यधिक पसीना आना, मुंह सूखना प्यास लगने के साथ थकान व कमजोरी मसहूस होना। इसे हीट एक्जाशन भी कहते हैं। यदि उचित सावधानी नहीं बरती जाए तो कोई भी स्वस्थ व्यक्ति इसका शिकार को हो सकता है। पर वे इसके शिकार अधिक हो सकते हैं जिन्हें पहले ही कोई दीर्घकालिक समस्या है जैसे उच्च रक्तचाप के मरीज। यदि वे लंबे समय तक अधिक तापमान के प्रभाव में रहते हैं तो स्ट्रोक भी हो सकता है। साथ ही छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्गों को भी बढ़े हुए तापमान में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
-प्रो. हर्षल साल्वे (कम्यूनिटी मेडिसिन, एम्स, दिल्ली)

छोटी-छोटी आदतों का करें विकास

  • पसीने के साथ शरीर से आवश्यक मिनरल्स भी निकल जाते हैं। सोडियम पोटैशियम, मैग्नीशियम इसके लिए केवल पानी से काम नहीं चलेगा।
  • छाछ को काला नमक व भूने जीरे के साथ लें। नमक कोशिकाओं से पानी की मात्रा बनाने रखने में मदद करेगा और दही के रूप में प्रोबायोटिक से आंतों को अधिक तापमान में ठंडक मिल सकेगी।
  • पराठा को छोड़कर दलिया, खीरा आदि को चुनें जिससे शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिलती है।
  • दोपहर को चाय के बजाय सत्तू या नारियल पानी, नींबू पानी का सेवन करें।
  • छोटे बच्चों का ध्यान रखें क्योंकि वे नहीं बता सकते कि उन्हें किस तरह की दिक्कत हो सकती है। वे सुस्त और अधिक नींद से परेशान हो सकते हैं।
  • घरों में ब्लैकआउट कर्टन यानी वे पर्दे जो कमरे में अंधेरा करने में मदद करते उनका प्रयोग करें, इससे कमरे में ठंडक बनी रहती है।
  • कमरे में शीतल प्रकाश भी गर्मी का अहसास कम करने में मदद कर सकता है।

फिटनेस रूटीन से न हो समझौता

फिटनेस एक्सपर्ट मीनल पाठक बताती हैं, “गर्मी के दिनों में भारी-भरकम कसरत टालना गलत नहीं, पर प्रयास करें कि कुछ हल्के व्यायाम व योगा बंद न हो। यह रक्तसंचार के लिए जरूरी है और इससे तरोताजा बने रहने में मदद मिलेगी। बेहतर होगा आप सुबह शीतल छांव वाली जगहों पर टहलने जाएं। स्ट्रेचिंग करें ताकि मांसपेशियों में महसूस होने वाली जकड़न कम हो। प्राणायाम से शरीर को ठंडा रखने में मदद मिली है। साथ ही समर फटीग से राहत दिला सकता है।”

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