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क्या आप भी रातभर Earbuds लगाकर सोते हैं? कानों के अंदर जा सकता है वैक्स, हो सकता है गंभीर इन्फेक्शन

कुछ लोग सोते समय कानों में ईयरफोन लगा लेते हैं ताकि वे म्यूजिक सुन सकें या फिर आसपास की आवाज को रोक सकें, लेकिन इससे नुकसान भी हो सकता है।

आपके कान खुले होते हैं, ताकि बाहर की ध्वनि अंदर आ सके, इसी खुलेपन के चलते कानों की आंतरिक नमी बाहर निकलती है। कानों को बंद करने वाले ईयर हेडफोन, विशेषकर जो सील बनाते हैं, उससे मॉइश्चर में रुकावट आ सकती है, जिससे बैक्टीरिया पनपने की आशंका बढ़ती है।

यह कानों के संक्रमण का कारण बन सकता है। अगर रात में स्नान करते हैं तो कानों में पानी पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में बेहतर होगा कि बिस्तर पर जाने से पहले कानों को सूखा कर लें। इसके लिए सिर से थोड़ी दूरी पर हेयर ड्रायर को रखकर इसका प्रयोग कर सकते हैं।

हालांकि, संक्रमण की आशंका बहुत अधिक नहीं होती, बशर्तें कि आप पहले से संक्रमण के प्रति संवेदनशील न हों। साथ ही त्वचा में जलन, खरोंच या कान को परदे को पहले नुकसान हुआ है, तो जोखिम बढ़ सकता है। संक्रमण के लक्षणों की बात करें तो इसमें दर्द, असुविधा होने, कानों में खुजली और तरल का रिसाव होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो सफाई करने की कानों की स्वाभाविक प्रक्रिया ईयरबड्स से बाधित हो सकती है। इससे कान की नली का वैक्स अंदर की तरफ जा सकता है। यदि आप अपने ईयरबड्स की टिप पर वैक्स फंसा हुआ देखते हैं, तो यह इसका एक संकेत हो सकता है।

कान में वैक्स जमने से हर किसी को लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन अगर दिन के समय में सुनने में दिक्कत हो रही है या कान में दबाव, भरापन या खुजली महसूस हो, या कान में घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई दे, तो डॉक्टर के परामर्श पर कान साफ करवा लेना चाहिए या ईयर-वैक्स हटाने वाली किट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

एक अध्ययन में पाया गया कि लगातार ईयरबड्स पहनने से त्वचा में जलन का खतरा बढ़ जाता है। यह संक्रमण के चलते भी हो सकता है। इससे उन चीजों से एलर्जी हो जा सकती है, जिनसे ये ईयरबड्स बने हैं। अगर खुजली या दर्द हो रहा है तो ईयरबड्स बदल देना चाहिए।

आवाज कम रखें

डॉक्टर बताते हैं कि लगातार तेज आवाज के प्रभाव में रहने से सुनने की क्षमता स्थायी तौर पर खत्म हो सकती है। हालांकि, सोने के लिए हल्की आवाज में संगीत सुनने से कोई ऐसी समस्या नहीं होती। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बातचीत के दौरान अमूमन 60 से 70 डेसिबल की ध्वनि होती है और यह हमेशा सुरक्षित रहती है।

लेकिन 80 डेसिबल से ऊपर की आवाज सुनने, जैसे हर सप्ताह 40 घंटे से अधिक अवधि के दौरान शोरगुल भले रेस्त्रां में रहने या हेडफोन के जरिये तेज संगीत सुनने से श्रवण क्षमता को नुकसान हो सकता है। अगर आपको पहले से सुनने में परेशानी है तो हो सकता है कि वोल्यूम बढ़ाना पड़े, जो हियरिंग को और डैमेज कर सकता है।

आइफोन में डिवाइस के डेसिबल स्तर को नियंत्रित करने और उसकी निगरानी की सुविधा होती है। आप एंड्रायड फोन के बिल्ट इन टूल्स या डेसिबल मीजरिंग एप को डाउनलोड करके भी यह काम कर सकते हैं। अगर आप इसके चलते अलार्म नहीं सुन पा रहे हैं तो सोते समय तेज ध्वनि में सुनना या न्वाइज कैसिंलिंग हेडफोन का प्रयोग करना खतरनाक हो सकता है। सोते समय अपनी पसंदीदा आवाज या संगीत सुनते हुए अपने स्मोक डिटेक्टर को टेस्ट कर सकते हैं, ताकि यह पक्का हो सके कि आप उसकी आवाज सुन सकते हैं।

अन्य विकल्प भी हैं

अगर सोते समय ईयरबड्स पहनना आपके लिए ठीक रहता है और आपको स्किन सेंसिटिविटी या कान के इन्फेक्शन की समस्या नहीं है तो एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको इन्फेक्शन के मामूली जोखिम के बारे में ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।

ऐसे ईयरबड्स चुनें जो कान की नली (इयर कैनाल) को पूरी तरह से बंद न करें। कुछ हेडफोन को ज्यादा मुलायम और कम उभार वाला बनाया जाता है, ताकि सोते समय उन्हें पहनने में आसानी हो और कानों में दर्द न हो। डॉक्टर ओवर-द-ईयर हेडफोन या इन-बिल्ट स्पीकर वाले हेडबैंड को भी अच्छा विकल्प बताते हैं।

इनमें इन-ईयर बड्स की तुलना में हवा का बहाव बेहतर रहता है और नमी कम जमा होती है। आप छोटे, चपटे स्पीकर भी देख सकते हैं, जिन्हें तकिए के कवर के अंदर रखा जा सकता है, ताकि कमरे में मौजूद किसी और को परेशान किए बिना आप अपना स्लीप पाडकास्ट सुन सकें।

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