सिद्धार्थनगर। जलवायु परिवर्तन आज के समय में भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है, जिससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। जनपद में पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि, वायु गुणवत्ता में गिरावट तथा मृदा की उर्वरता प्रभावित हो रही है। यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
उक्त विचार मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने व्यक्त करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन अब एक वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिसका प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों सहित आम जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने जागरूकता, समय पर तैयारी और सामुदायिक सहभागिता को आपदा से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बताया।
उन्होंने कहा, “हम सभी को प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग करना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण मिल सके।” यह विचार उन्होंने गौतम बुद्ध जागृति समिति एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में व्यक्त किए, जिसका उद्देश्य आपदाओं से निपटने के लिए समुदाय की अनुकूलनशीलता और लचीलापन को सुदृढ़ करना था।
संस्था के सचिव श्रीधर पांडेय ने आपदा पूर्व तैयारी पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा एक सुदृढ़ आपदा रेडीनेस योजना विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत स्वयंसेवकों एवं समुदाय को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कम्युनिटी रिस्क रजिस्टर की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसके माध्यम से गांव स्तर पर जोखिमों की पहचान, संवेदनशील परिवारों का चिन्हांकन तथा आपदा के दौरान त्वरित सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी सुश्री पुष्पांजलि सिंह ने जनपद की समग्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण योजना तथा विशेष रूप से हीट वेव एक्शन प्लान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए जनपद में विशेष तैयारियां की जा रही हैं, जिनमें जनजागरूकता अभियान, सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल एवं छाया की व्यवस्था, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं श्रमिक स्थलों के समय में आवश्यक परिवर्तन तथा स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी शामिल हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, आईसीडीएस, यूपीनेडा, व्यापार संगठन एवं विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और विभागीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयास, बेहतर समन्वय और जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।





