दीनी तालीम के साथ बच्चों को आधुनिक शिक्षा भी ज़रूरी: मौलाना असकरी

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अम्बेडकरनगर अकबरपुर तहसील क्षेत्र के सिकंदरपुर स्थित हुसैनिया सदर इमामबाड़े में रविवार को दिवंगत समाजसेवी सैयद बाकर हैदर जैदी के इसाले सवाब की मजलिस आयोजित हुई। मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में मोमनीन मौजूद रहे। दिल्ली से तशरीफ लाए मौलाना सैयद काजी अस्करी ने अपने बयान में शिक्षा और दीन की अहमियत पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ दीन-ए-इस्लाम की सही समझ देना बेहद जरूरी है, ताकि वे एक अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

मौलाना ने कहा कि इस्लाम अमन, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देता है। हजरत मोहम्मद मुस्तफा के नवासों हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन अ.स. की कुर्बानियां हमें सच्चाई, सब्र और इंसाफ के रास्ते पर चलने की सीख देती हैं। कर्बला का वाकया सिर्फ एक इतिहास नहीं, बल्कि हर दौर के लिए एक पैगाम है कि हक और सच के लिए डटे रहना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की तालीम पर विशेष ध्यान दें और उन्हें अच्छे संस्कारों से भी रूबरू कराएं।

मजलिस के दौरान कर्बला के शहीदों का जिक्र सुनकर माहौल गमगीन हो गया और मोमनीन की आंखें नम हो उठीं। कार्यक्रम में मौलाना नूरूल हसन रिजवी, मौलाना रमजान अली, मौलाना अशफाक, मौलाना ज़फ़र मारुफी, मौलाना मुशीर जलालपुरी,नकी हैदर जैदी, अशफाक हुसैन, अहमद रजा जैदी,बेलाल हैदर, इमरान हैदर,हाजी कमर मसरूर आलम जैदी,हसन मुसन्ना, मोहम्मद अली जैदी, परवेज रज़ा,जमाल हैदर शहजाद आब्दी, सलमान हैदर,हेलाल पत्रकार मोहम्मद रजा हैदर,अमान अब्बास आदि मौजूद मौजूद रहे।

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