Wednesday, April 29, 2026
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‘आईपीआर प्रबंधन’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित

केएमसीएलयू के अवध इनक्यूबेशन फाउंडेशन द्वारा विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस पर ‘आईपीआर प्रबंधन’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित

लखनऊ, 25 अप्रैल 2026: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (केएमसीएलयू) के अवध इनक्यूबेशन फाउंडेशन द्वारा विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस के अवसर पर आज विश्वविद्यालय परिसर में “आईपीआर प्रबंधन” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम अवध इनक्यूबेशन फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रो. सैयद हैदर अली के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। विधि अध्ययन संकाय के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत वरुण ने कार्यक्रम का समन्वयन किया, जबकि डॉ. आशीष शाही ने सत्र का आयोजन किया।

अवध इनक्यूबेशन फाउंडेशन की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) डॉ. डोआ नक़वी ने अपने संबोधन में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के बीच महत्वपूर्ण संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी आईपीआर प्रबंधन, एसडीजी 9 (उद्योग, नवाचार और अवसंरचना) तथा एसडीजी 8 (सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास) की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। डॉ. नक़वी ने कहा, “आईपीआर संरक्षण नवाचार को प्रोत्साहित करता है, सृजनकर्ताओं को उचित प्रतिफल सुनिश्चित करता है और सतत आर्थिक विकास को गति देता है।”

मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास भाटी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अपने मुख्य वक्तव्य में उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों की मूल अवधारणा, उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया, व्यावहारिक लाभ तथा विभिन्न प्रकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में आईपी जागरूकता की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आमंत्रित वक्ता के रूप में सिल्वर आईपी के संस्थापक निदेशक श्री ज़फ़र अहमद ने भाग लिया। उन्होंने पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों तथा शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के लिए पेटेंट संरक्षण के रणनीतिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की।

इस अवसर पर प्रो. सैयद हैदर अली ने अपने संबोधन में नवाचार और इनक्यूबेशन की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बौद्धिक संपदा को बाज़ारोन्मुख समाधानों में परिवर्तित करने में सहायक है। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को अनुसंधान के व्यावसायीकरण के लिए इनक्यूबेशन सेंटर का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

इस व्याख्यान में विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके पश्चात एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने बौद्धिक संपदा से जुड़े वास्तविक चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की।

कार्यक्रम का समापन डॉ. आशीष शाही द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

अवध इनक्यूबेशन सेंटर भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

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