कार्यक्रम में ब्रह्मानंद महाराज के चित्र पर विद्यालय प्रबंधक मनोज तिवारी ने पुष्प अर्पित किए और उनके बलिदान और जीवन पर प्रकाश डाला
महोबा। बुंदेलखंड के मालवीय, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व सांसद स्वामी ब्रह्मानंद महाराज की 131वीं जयंती पर नगर के डीएवी इंटर कॉलेज एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ब्रह्मानंद महाराज के चित्र पर विद्यालय प्रबंधक मनोज तिवारी ने पुष्प अर्पित किए और उनके बलिदान और जीवन पर प्रकाश डाला। इस मौके पर मौजूद छात्रों से उनके पद् चिन्हों पर चलकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित किया।
कालेज के प्रबंधक ने कहा कि ब्रह्मानंद महाराज ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हुए हमीरपुर जिले के राठ कस्बे में शिक्षण संस्थानों की नींव रखने हुए ब्रह्मानंद इंटर कॉलेज (1938) ब्रह्मानंद संस्कृत महाविद्यालय (1943) तथा ब्रह्मानंद महाविद्यालय (1960) की स्थापना कराई साथ ही शिक्षा प्रसार के लिए अन्य विद्यालयों की नींव रखी थी। कहा कि स्वामी जी का लोधी समाज में सबसे बड़ा नाम है। स्वामी ब्रह्मानंद ने समाज सुधार के लिए अनेक कार्य किए।
देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर कई आंदोलनों में जेल काटी। कहा कि आजादी के बाद देश की राजनीति में भी उनका खासा योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि महाराज का जन्म 04 दिसंबर, 1894 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था। स्वामी ब्रह्मानंद के पिता का नाम मातादीन लोधी तथा माता का नाम जशोदाबाई था। स्वामी ब्रह्मानंद के बचपन का नाम शिवदयाल था। स्वामी ब्रह्मानंद ने बचपन से ही समाज में फैले हुए अंधविश्वास और अशिक्षा जैसी कुरीतियों का डटकर विरोध किया और वह आजाद भारत के पहले संन्यासी सांसद थे।
प्रधानाचार्य संतोष कुमार ने कहा कि स्वामी ब्रह्मानंद की प्रारम्भिक शिक्षा हमीरपुर में ही हुई। इसके पश्चात् उन्होंने घर पर ही रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया। इसी कारण लोग उन्हें स्वामी ब्रह्मानंद से बुलाने लग। उन्होंने बताया कि बालक शिवदयाल (स्वामी ब्रह्मानंद महाराज) के बारे में संतों ने भविष्यवाणी कि थी कि यह बालक या तो राजा होगा या प्रख्यात संन्यासी बनेगा और स्वामी ब्रह्मानंद ने 24 वर्ष की आयु में पुत्र और पत्नी का मोह त्याग गेरुवा वस्त्र धारण कर परम पावन तीर्थ स्थान हरिद्वार में भागीरथी के तट पर ‘‘हर की पैड़ी’’ पर संन्यास की दीक्षा ली। संन्यास के बाद शिवदयाल लोधी संसार में ‘‘स्वामी ब्रह्मानंद’’ के रूप में प्रख्यात हुए। इस मौके पर क्रय विक्रय समिति के अध्यक्ष मुकेश विकास गुप्ता, धनीराम वर्मा वेद प्रकाश द्विवेदी सहित विद्यालय के शिक्षक व छात्र मौजूद रहे।





