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मेरठ में अधिवक्ताओं पर उ.प्र. पुलिस द्वारा लाठी-चार्ज बर्बर कार्यवाही: ए.ऍफ़.टी.बार
मुख्यमंत्री अधिवक्ता हित में दस-सूत्रीय फार्मूले को अविलम्ब लागू करें : विजय कुमार पाण्डेय

ए.ऍफ़.टी.बार एसोसिएशन, लखनऊ ने उत्तर-प्रदेश पुलिस द्वारा दिनांक 16/10/2017 को मेरठ में अधिवक्ताओं पर बर्बर लाठीचार्ज किए जाने का व्यापक विरोध अधिवक्ताओं द्वारा किया गया बार ने 23 अक्टूबर को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित विरोध का निर्णय लिया था जिसके तहत आज उत्तर-प्रदेश सरकार और पुलिस का विरोध किया गया और जिलाधिकारी लखनऊ के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बार के एक प्रतिनधि-मंडल ने दस-सूत्रीय मांग का ज्ञापन देते हुए उसे अविलम्ब अधिवक्ता हित में लागू किये जाने की मांग भी की l बार के महामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने मीडिया को बताया कि उत्तर-प्रदेश पुलिस एवं सरकार प्रदेश के अधिवक्ताओं की आवाज को बलपूर्वक दबाना चाहती है, जिसे हमारी बार किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं करेगी हमारी बार का एक प्रतिनिधि-मंडल जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के सामने दस-सूत्रीय फार्मूले को अविलम्ब लागू किये जाने की मांग की है|

विजय पाण्डेय ने बताया कि हमारी दस-सूत्रीय मांगों में प्रदेश के अधिवक्ताओं के प्रति हो रही दमनात्मक कार्यवाही पर रोंक लगाना, प्रदेश के वयोवृद्ध एवं महिला अधिवक्ताओं पर होने वाली बर्बरता को तत्काल प्रभाव से रोंका जाना, अधिवक्ताओं पर किए गए लाठीचार्ज में शामिल दोषी पुलिस-कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही, पुलिस लाठीचार्ज में घायल प्रत्येक वयोवृद्ध अधिवक्ता को उ.प्र. सरकार रु.पचास हजार एवं प्रत्येक महिला-अधिवक्ता को उ.प्र. सरकार रु.एक लाख बतौर मुआवजा, अधिवक्ताओं के असंतोष की स्थिति में जिलाधिकारी/उपजिलाधिकारी ही प्रतिनिधि-मण्डल के माध्यम से निस्तारित करें, अधिवक्ताओं से संबंधित मांगों/समस्यायों को उ.प्र. सरकार प्राथमिकता के आधार पर त्वरित रूप से निस्तारित करे जिससे; कार्यपालिका के साथ भविष्य में होने वाले टकराव को रोंका जा सके, प्रदेश की महिला-अधिवक्ताओं से संबंधित मांगों/समस्यायों पर सरकार बगैर किसी विलम्ब के कार्यवाही करना सुनिश्चित करे, प्रदेश के अधिवक्ताओं से संबंधित शिकायतों के लिए सरकार एक सम्पर्क नम्बर, पोर्टल एवं व्हाट्स एप नम्बर सचिव स्तर का अधिकारी की निगरानी में तत्काल प्रभाव से जारी करे और उ.प्र. के प्रत्येक जिले के सभी बार प्रतिनिधियों के साथ प्रत्येक तिमाही संयुक्त मीटिंग, जिला मुख्यालय पर, आहूत की जाए जिससे अधिवक्ताओं की समस्याओं और उनके समक्ष उपस्थित चुनौतियों को सरकार समझ सके और उसके समाधान में सरकार को आसानी हो और भविष्य में होने वाले किसी भी टकराव को रोंका सका |
बार के पूर्व महामंत्री डी.एस.तिवारी ने कहा कि सरकार और पुलिस ने अधिवक्ताओं को जिस तरह से मेरठ में बर्बर कार्यवाही का शिकार बनाया इसे अब नजरंदाज नहीं किया जा सकता, यदि हमारी मांगें न मांनी गई तो हम बड़े संघर्ष का रास्ता अपना सकते हैं, संयुक्त-सचिव पंकज शुक्ला ने इसे कायराना, पूर्व-कोषाध्यक्ष आर.चन्द्रा ने अमानवीय कृत्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता शमशाद आलम ने गैर-जिम्मेदार सरकार की असफलता की कार्यवाही बताया |महोदय, अधिवक्ताओं के विरुद्ध उ.प्र.पुलिस द्वारा की गई बर्बर एवं अमानवीय कार्यवाही से हमारी बार आहत है इसलिए हमारी बार अधिवक्ता हित में सरकार से दस-सूत्रीय मांग को अविलम्ब लागू करने की मांग करती है अन्यथा हमारी बार अधिवक्ता हित में व्यापक कदम उठाने के लिए बाध्य होगी |
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