मध्यांचल डिस्काम की लैब में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच बिना मान्यता के होने का खुलासा हुआ है। उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
लखनऊ। स्मार्ट प्रीपेड मीटर की गुणवता को लेकर उठ रहे सवालों पर गठित की गई तकनीकी समिति द्वारा मध्यांचल डिस्काम की जिस लैब से मीटर के नमूनों की जांच कराई गई थी उसे ऐसी जांच करने की मान्यता ही नहीं मिली है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन (एनएबीएल) द्वारा स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रीपेड स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार पुराने मीटर के स्थान पर स्मार्ट मीटर लगाने पर पहले ही रोक लगा चुकी है। हालांकि, नया कनेक्शन स्मार्ट मीटर के जरिए ही दिया जा रहा है।
वर्मा का आरोप है कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने अपनी हाई-टेक लैब को IS16444 के अनुरूप स्मार्ट मीटरों के एक्सेप्टेंस टेस्ट के लिए अधिकृत बताया था लेकिन एनएबीएल के जवाब से साफ है कि प्रयोगशाला भारतीय मानकों अनुरूप ही स्मार्ट मीटरों के ‘एक्सेप्टेन्स टेस्ट’ करने के लिए सक्षम और अधिकृत है। वर्मा ने कहा कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
किसी स्तर पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अधिनियम एवं गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का उल्लंघन पाया जाए तो संबंधित अधिकारियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
विदित हो कि चार सदस्यीय तकनीकी समिति में आईआईटी कानपुर के दो प्रोफेसर सहित वड़ोदरा के इलेक्ट्रिकल रिसर्च एवं डवलपमेंट एसोसिएशन के अनुभाग प्रमुख और पावर कारपोरेशन के निदेशक वितरण हैं।
12 अप्रैल को गठित समिति को स्मार्ट मीटरों का तकनीकी परीक्षण कर 10 दिन में रिपोर्ट देनी थी लेकिन अब तक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि राज्य में 86 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।





