पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत और ओमान के बीच व्यापार समझौता लागू हो गया है, जिससे भारत को उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव से तेल, गैस और अन्य कमोडिटी (Oil & Gas Supply) की सप्लाई बाधित हुई है, और इससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट (Energy Crisis) गहराया है। ईरान और अमेरिका में हुए सैन्य संघर्ष से भारत में भी पिछले दिनों गैस और उर्वरक की आपूर्ति बाधित हुई है। हालांकि, सप्लाई को दुरुस्त करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में भारत और ओमान के बीच 1 जून से लागू हुए व्यापार समझौते से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण बाधित पेट्रोकेमिकल्स और उर्वरक की बेहतर सप्लाई सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
दरअसल, भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत भारतीय निर्यात के 99 प्रतिशत हिस्से पर लगे टैरिफ हटा दिए गए हैं, जिससे निवेश संबंधों को और मजबूत करने का रास्ता साफ हुआ है।
ओमान, उर्वरक और ऊर्जा का अहम सप्लायर
ओमान पहले से ही भारत को उर्वरक, ऊर्जा और औद्योगिक कच्चे माल का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। वित्त वर्ष 2026 में, नई दिल्ली ने ओमान से 7.2 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जिसमें 1.6 अरब डॉलर का कच्चा तेल, 1.2 अरब डॉलर का एलएनजी और 843 मिलियन डॉलर का उर्वरक शामिल था। ओमान के विदेश व्यापार सलाहकार पंकज खिमजी ने 1 जून को कहा कि ओमान भारत को अधिक उर्वरक और पेट्रोकेमिकल्स की आपूर्ति करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, “अगर भारत अनुरोध करता है, तो वह ‘ओमान इंडिया फर्टिलाइजर प्रोजेक्ट’ (जो इफ्को, कृभको और ओमान निवेश प्राधिकरण का संयुक्त उद्यम है) से अपने हिस्से का उत्पादन भारत की ओर मोड़ने पर विचार कर सकता है।” वहीं, भारत ने इसके बदले ओमान को खाद्य सुरक्षा का भरोसा दिया है। ईरान युद्ध के बाद भारत ने रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र और टोगो जैसे अन्य देशों से उर्वरकों की आपूर्ति में विविधता लाई है।
क्या है इंडिया-ओमान CEPA?
यह समझौता भारत और ओमान के बीच दिसंबर में साइन हुआ और दोनों पक्षों द्वारा सहमति जताने के बाद लागू हुआ।
- इस समझौते के तहत, भारत ने खाड़ी देश को होने वाले अपने 99.38 प्रतिशत निर्यात पर मूल्य के हिसाब से शुल्क-मुक्त पहुंच हासिल कर ली है, जिसमें ओमान की 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनें शामिल हैं।
- ओमान ने भारत से आयात होने वाले 99% सामानों (जैसे कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री और खाद्य उत्पाद) पर टैरिफ (आयात शुल्क) कम कर दिया है या शून्य कर दिया है।
- इस समझौते के तहत ओमान भारतीय कामगारों और व्यवसायों को वीज़ा में रियायत देगा। भारतीय कंपनियाँ जो ओमान में निवेश कर रही हैं, वे ओमान सरकार के स्थानीय रोजगार नियमों (Local Quota) से अधिक भारतीय कर्मचारियों को काम पर रख सकेंगी।
- इसके बदले में, भारत ने भी ओमान से आयात होने वाले 78% उत्पादों (जैसे ऊर्जा, उर्वरक और औद्योगिक उत्पाद) पर आयात शुल्क खत्म या कम कर दिया है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को ओमान से सस्ते खजूर मिल सकेंगे। साथ ही, ओमान से मार्बल (संगमरमर) के आयात पर लगा प्रतिबंध भी हटा लिया गया है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता ओमान के प्रमुख बंदरगाहों के जरिए पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf region) में भारत की पहुंच को आसान बनाएगा। संयुक्त अरब अमीरात के बाद खाड़ी देश के साथ भारत का यह दूसरा व्यापार समझौता है।
सरकार को उम्मीद है कि इस समझौते से निर्यात को तत्काल बढ़ावा मिलेगा। वित्त वर्ष 2026 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 11.18 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष के 10.61 अरब डॉलर से अधिक है।





