जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में आंतरिक कलह फिर से मुखर हो गई है, जिसमें पार्टी के एक वर्ग ने मौजूदा प्रमुख तारिक हमीद कर्रा की विचारधारा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर संगठनात्मक समीक्षा की मांग की गई है, जबकि कुछ नेता इसे निजी राजनीतिक लाभ बता रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस में समाप्त होती नजर आ रही अंतर्कलह फिर से मुखर होने लगी है। पार्टी का एक बड़ा वर्ग न सिर्फ नेशनल कान्फ्रेंस के साथ गठबंधन जारी रखने के औचित्य के साथ साथ मौजूदा प्रदेश प्रमुख की राजनीतिक विचाराधारा पर भी बिना नाम लिए सवाल उठा रहा है।
कुछ कांग्रेसियों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी पत्र लिखकर प्रदेश कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं, मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों की एक बैठक बुलाने व निकट भविष्य मेंं जम्मू-कश्मीर में संभावित पंचायत और नगर निकाय चुनावाें के मद्देनजर प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और गतिविधियों की समीक्षा का आग्रह किया है।
… वह कांग्रेस को नुक्सान ही पहुंचाएंगे
कांग्रेस में फिर से सिर उठा रही अंतर्कलह की पुष्टि गत दिनों पूर्व उपमुख्यमंत्री ताराचंद की निगरानी में आयोजित एक सभा में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वकार रसूल वानी के भाषण से हुई है। उन्होंने अपने भाषण में मौजूदा प्रदेश कांग्रेस प्रमुख तारिक का नाम लिए बगैर कहा कि जिन लोगों की राजनीतिक विचारधारा कांग्रेस के मूल वैचारिक सिद्धांतों से मेल नहीं खाते, वह कांग्रेस को नुक्सान ही पहुंचाएंगे।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान और भारत की संयुक्त करंसी को मान्यता देने के तारिक हमीद करा के एक सुझाव का भी जिक्र किया।आपको बता दें कि तारिक हमीद करा कांग्रेस में शामिल होने से पहले पीडीपी में थे और पीडीपी की सरकार में वित्तमंत्री रहते हुए उन्होंने साझा करंसी का सुझाव दिया था। वकार रसूल वानी ने कहा कि सेल्फ रूल की वकालत करने वाले कैसे कांग्रेस के हितैषी हो सकते हैं।
नेकां गठजोड़ पार्टी की सबसे बड़ी गलती
उन्होंने नेशनल कान्फ्रेंस के साथ गठबंधन को वर्ष 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की “सबसे बड़ी गलती” बताया। उन्होंने कहा कि नेशनल कान्फ्रेंस लगातार कांग्रेस को नीचा दिखा रही है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का सहयोग करने के बजाय नेशनल कान्फ्रेंस ने एक सीट भाजपा को दी और प्रदेश कांग्रेस के कर्णधार इस पर दिखावे की नाराजगी जताते रहे।
कांग्रेस एक अन्य वरिष्ठ नेता ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा कि तारांचद और वकार रसूल किसके खास हैं और कौन इनका संरक्षक रहा है, ज्यादा बताने की जरुरत नहीं है। जो लोग अपनी सीट तक नहीं बचा सकते वह पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। मौजूदा समय में प्रदेश कांग्रेस लगातार सक्रिय है, वह सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद अपने राजनीतिक एजेंडे पर कोई समझौता नहीं कर रही है।
प्रतीक्रिया देने से बचते नजर आए भल्ला
कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष और पूर्वमंत्री रमन भल्ला ने कहा कि वकार रसूल वानी के दावों पर किसी तरह की प्रतिक्रिया से बचते हुए कहा कि हम कांग्रेस के सिपाही हैं, हम राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी के सिपाही हैं। यहां कुछ लोग अपने निजि राजनीतिक लाभ के लिए पार्टी को नुक्सान पहुंचाने में लगे हैं, वह लोगों के बीच अपनी वाहवाही चाहते हैं और वही आज प्रदेश कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं।
अगर किसी मुद्दे पर असहमति है तो संगठन के भीतर उस पर चर्चा हो सकती है।स्टेटहुड का मुद्दा हो, रोजगार का मामला हो या बिजली की बात हो, जिस मुखरता से प्रदेश कांग्रेस ने इन विषयों पर प्रदेश में लोगों की आवाज उठाई है,उससे कुछ लोग परेशान हैं और वही प्रदेश कांग्रेस प्रमुख पर सवाल उठा रहे हैं।





