मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे भी जारी रहेगा चरणबद्ध आंदोलन : राधेरमण त्रिपाठी
सिद्धार्थनगर। टीचर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (टीएफआई) के आह्वान पर वर्ष 2010 से नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में सोमवार को जिले के शिक्षकों ने अपने बांह पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। शिक्षकों ने इसे शांतिपूर्ण विरोध का प्रतीक बताते हुए सरकार से निस्तारण की मांग किया। शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2010 से पूर्व कार्यरत शिक्षकों पर पुनः टीईटी अनिवार्यता थोपना न्यायोचित नहीं है।
उनका तर्क है कि वे लंबे समय से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और विद्यार्थियों के हित में लगातार कार्य कर रहे हैं। नियुक्ति के समय जो पात्रता निर्धारित थी उसे पूर्ण कर ही सेवा में आए हैं। ऐसे में नई अनिवार्यता से उनके सेवा अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर लिए गए निर्णय के अनुसार प्रथम चरण में डिजिटल प्लेटफार्म पर अभियान चलाया गया। अब 25 फरवरी तक शिक्षक अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। उसके बाद जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे भी चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।





