एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक गंभीर खतरा है, जो एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध और गलत इस्तेमाल से बढ़ रहा है। इससे बैक्टीरिया शक्तिशाली हो जाते हैं और दवाएं उन पर बेअसर हो जाती हैं। इससे भविष्य में छोटी-मोटी बीमारियां भी जानलेवा बन सकती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स न लें, कोर्स पूरा करें और दूसरों को अपनी दवा न दें, ताकि इस खतरे से बचा जा सके।
आज के दौर में मेडिकल साइंस ने बहुत प्रगति कर ली है, लेकिन एक अदृश्य खतरा हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, जिसका नाम है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance)। एंटीबायोटिक्स वे दवाएं हैं जिनका इस्तेमाल निमोनिया और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता था, लेकिन इनके अंधाधुंध और गलत इस्तेमाल ने बैक्टीरिया को और ज्यादा शक्तिशाली बना दिया है।
जब हम बिना जरूरत के या गलत तरीके से एंटीबायोटिक्स लेते हैं, तो शरीर के बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ लड़ना सीख जाते हैं। इसे ही रेजिस्टेंस कहते हैं। अगर यह सिलसिला यूं ही चलता रहा, तो भविष्य में एक छोटी-सी खरोंच या मामूली इन्फेक्शन भी जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि दवाएं काम करना बंद कर देंगी।
इसलिए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए इन दवाओं के प्रति जागरूक होना जरूरी है। आइए जानें डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल (डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, यथार्थ सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से एंटीबायोटिक्स से जुड़े कुछ मामूली सवालों के जवाब, जो इन दवाओं के बारे में आपको जानकार बनाने में मदद करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
एंटीबायोटिक्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना क्यों जरूरी है?
- जवाब- हर इन्फेक्शन को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर यह जांचते हैं कि बीमारी बैक्टीरिया की वजह से है या वायरस से, और फिर सही दवा, उसकी खुराक और कितने वक्त तक लेनी है, यह तय करते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, सही इलाज में देरी हो सकती है और रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है।
क्या एंटीबायोटिक्स ‘खांसी-जुकाम’ या ‘फ्लू’ में असरदार होते हैं?
- जवाब- जी नहीं। खांसी, जुकाम और फ्लू अक्सर वायरस के कारण होते हैं। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया के खिलाफ काम करते हैं। वायरल इन्फेक्शन में इन्हें लेने से कोई फायदा नहीं होता, बल्कि शरीर को नुकसान और रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है।
क्या ‘तेज असर’ के लिए साधारण बुखार में भी एंटीबायोटिक लेना ठीक है?
- जवाब- नहीं। हल्का बुखार अक्सर वायरल इन्फेक्शन या शरीर की सामान्य रिएक्शन के कारण होता है। जब तक बैक्टीरिया मौजूद न हों, एंटीबायोटिक्स बुखार कम नहीं करते। इनका गैर-जरूरी इस्तेमाल रिकवरी तेज करने के बजाय सेहत को बिगाड़ सकता है।
मेरे परिवार के किसी सदस्य को मेरे जैसे ही लक्षण हैं, क्या मैं अपनी एंटीबायोटिक उन्हें दे सकता हूं?
- जवाब- बिल्कुल नहीं। एक जैसे लक्षण होने का मतलब यह नहीं है कि इन्फेक्शन भी एक ही हो। उम्र, वजन और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर दवा और उसकी खुराक बदल जाती है। एक-दूसरे की दवा खाना असुरक्षित है और इससे रेजिस्टेंस बढ़ सकता है।
क्या एंटीबायोटिक्स ‘खांसी-जुकाम’ या ‘फ्लू’ में असरदार होते हैं?
- जवाब- जी नहीं। खांसी, जुकाम और फ्लू अक्सर वायरस के कारण होते हैं। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया के खिलाफ काम करते हैं। वायरल इन्फेक्शन में इन्हें लेने से कोई फायदा नहीं होता, बल्कि शरीर को नुकसान और रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है।
क्या ‘तेज असर’ के लिए साधारण बुखार में भी एंटीबायोटिक लेना ठीक है?
- जवाब- नहीं। हल्का बुखार अक्सर वायरल इन्फेक्शन या शरीर की सामान्य रिएक्शन के कारण होता है। जब तक बैक्टीरिया मौजूद न हों, एंटीबायोटिक्स बुखार कम नहीं करते। इनका गैर-जरूरी इस्तेमाल रिकवरी तेज करने के बजाय सेहत को बिगाड़ सकता है।
मेरे परिवार के किसी सदस्य को मेरे जैसे ही लक्षण हैं, क्या मैं अपनी एंटीबायोटिक उन्हें दे सकता हूं?
- जवाब- बिल्कुल नहीं। एक जैसे लक्षण होने का मतलब यह नहीं है कि इन्फेक्शन भी एक ही हो। उम्र, वजन और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर दवा और उसकी खुराक बदल जाती है। एक-दूसरे की दवा खाना असुरक्षित है और इससे रेजिस्टेंस बढ़ सकता है।





