नर्सिंग छात्रा ने की खुदकुशी, कमरा खुला तो दंग रह गई रूम पार्टनर

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में एक नर्सिंग छात्रा ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट में लिखा मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। मैं डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन मेरा सपना अधूरा रह गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। घरवालों के साथ ही हास्टल के अधिकारियों कर्मचारियों व प्रीति के सहपाठी छात्राओं से बातचीत की।

‘मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। मैं डाक्टर बनना चाहती थी, लेकिन मेरा सपना अधूरा रह गया। मैं बीमारी से बहुत परेशान होकर सुसाइड करने जा रही हूं। अब और नहीं झेल सकती’। यह सुसाइड नोट स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय स्थित नर्सिंग हास्टल में जीएनएम प्रथम वर्ष की 20 वर्षीया छात्रा प्रीति सरोज ने लिखकर बुधवार सुबह फंदे से लटककर जान दे दी। कोतवाली पुलिस के साथ ही फोरेंसिक टीम ने जांच पड़ताल की। घरवालों के साथ ही हास्टल के अधिकारियों, कर्मचारियों व प्रीति के सहपाठी छात्राओं से बातचीत की।

कौशांबी-प्रतापगढ़ सीमा स्थित फरीदपुर गांव निवासी शत्रुध्न सरोज मजदूरी करते हैं। उनकी पत्नी भी मजदूरी करती हैं। उनकी दो पुत्री व दो पुत्र में दूसरे नंबर की प्रीति पढ़ाई में काफी तेज थी, जिस कारण पिछले वर्ष उसका प्रवेश सरकारी कालेज में हुआ था। वह जीएनएम प्रथम वर्ष की छात्रा थी और एसआरएन चिकित्सालय स्थित नर्सिंग हास्टल में रहती थी।

11 फरवरी को उसकी तबीयत बिगड़ी तो दूसरे दिन उसके पिता यहां आए और उसे अपने साथ घर ले गए। तबीयत ठीक होने पर 23 फरवरी को हास्टल लाकर छोड़ा। बुधवार सुबह 7:22 बजे प्रीति ने अपने पिता को फोन किया। मेडिकल प्रमाण पत्र लाने की बात कही। उसके पिता घर में रखा मेडिकल प्रमाण पत्र लेकर निकलते, इसके पहले उनके पास हास्टल से फोन आया कि प्रीति ने खुदकुशी कर ली है।

वह पत्नी के साथ रोते-बिलखते यहां पहुंचे। कोतवाली इंस्पेक्टर राजीव तिवारी फोर्स के साथ पहुंचे। हास्टल के अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद उसके साथ कमरे में रहने वाली छात्रा से बातचीत की। उसने बताया कि कमरे में पांच छात्राएं रहती थीं।

महाशिवरात्रि पर दर्शन करने के लिए तीन मंदिर चली गईं थीं। वह कमरे में थीं। प्रीति ने उससे कहा कि उसे दवा लगानी है, इसलिए कुछ देर के लिए बाहर चली जाए। इसके बाद उसने भीतर से बंद कर लिया। कुछ देर बाद उसने दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन कोई आहट नहीं मिली।

आवाज देने पर भी प्रीति ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह बात उसने हास्टल के कर्मचारियों को बताई। खिड़की से कमरे के भीतर देखा गया तो पंखे से नायलान की रस्सी के सहारे उसकी लाश लटक रही थी। उसने यह भी बताया कि इधर कुछ समय से प्रीति परेशान थी। उसे कोई बीमारी थी, जिससे वह टूट गई थी।

पुलिस ने फोरेंसिक टीम को बुलाया और फिर किसी प्रकार दरवाजा खोलकर पुलिस भीतर दाखिल हुई। मेज पर सुसाइड नोट रखा था। पुलिस ने घरवालों से बातचीत की, लेकिन वह आत्महत्या की कोई वजह नहीं बता सके।

एसीपी कोतवाली मनोज सिंह का कहना है कि छात्रा को पहले एक कान से सुनाई नहीं पड़ता था। इधर उसके दूसरे कान से भी सुनाई पड़ना बेहद कम हो गया था। इससे वह परेशान रहती थी और संभवत: इसी वजह से उसने खुदकुशी की है। हालांकि, मामले की जांच की जा रही है।

हमेशा कहती थी, गरीबी व हालातों से लड़ना सीखो

प्रीति की खुदकुशी की खबर पाकर उसके माता-पिता पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पिता ने बताया कि उसके चार बच्चे हैं। सबसे बड़ी पुत्री की शादी हो गई है। प्रीति दूसरे नंबर पर थी, जबकि इसके बाद पुत्र अंकित व आशीष हैं। प्रीति ने जब सुबह उनको फोन किया तो वह ठीक थी। बस इतना बोला कि मेडिकल प्रमाण पत्र लेकर आइए।

इसके कुछ ही देर बाद उनको पता चला कि बेटी ने आत्महत्या कर ली है। मां ने बताया कि बेटी से बहुत उम्मीद थी। वह पढ़ने में होनहार थी। सोचा था कि जीवन भर गरीबी का जो दंश झेला बुढ़ापे में सुख मिलेगा, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। बोली कि बेटी हमेशा कहती थी कि गरीबी व हालातों से लड़ना सीखो। कभी घबराओ नहीं, लेकिन वह ही हालातों से नहीं लड़ सकी।

हास्टल में रहने वाली छात्राएं बोलीं, मिलनसार थी प्रीति

एसआरएन चिकित्सालय स्थित नर्सिंग हास्टल में रहने वाली छात्राएं प्रीति सरोज की खुदकुशी के बाद दुखी है। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर अचानक यह सब कैसे हो गया। उसके साथ रहने वाली छात्राओं ने पुलिस को बताया कि प्रीति कुछ परेशान तो रहती थी, लेकिन कभी ऐसा नहीं लगा कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी।

मंगलवार रात के बाद बुधवार सुबह भी वह उसी तरह थी, जैसे पहले रहती थी। उसने सुसाइड नोट कब लिखा, यह नहीं पता। संभवत: कमरे में मौजूद छात्रा को बाहर निकालने के बाद उसने सुसाइड नोट लिखा था। छात्राओं ने बताया कि प्रीति काफी मिलनसार थी। वह सभी से एकसमान व्यवहार रखती थी। बड़े मन से पढ़ाई करती थी। हमेशा यही कहती थी कि उसका सपना डाक्टर बनने का था।

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