Wednesday, May 6, 2026
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कहीं जुलूसों मे हत्यारों का प्रदर्शन धार्मिक उन्माद फैलाना तो नहीं

कहीं जुलूसों मे हत्यारों का प्रदर्शन धार्मिक उन्माद फैलाना तो नहीं
जहां दो धर्मों ,संप्रदायों या मतो को मानने वाले लोग रहते हो फिर चाहे वह बहुसंख्यक हो या अल्पसंख्यक ही क्यों ना हो वहां जब कभी भी धार्मिक जुलूस निकाले गए दंगा जरूर भड़का है,
अपवाद स्वरुप ही कभी ऐसा ना हुआ हो तो ना हुआ हो ।
इस तथ्य को जानते हुए भी अगर किसी खास पर्व, त्यौहार या अन्य मौकों पर धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं तो निश्चित रूप से इसे दंगों को निमंत्रण देने वाला ही कहा जाएगा ?
ऐसे मौकों पर जगह बदल जाती है लेकिन
होने वाले दंगे जो हर जगह बदल जाते हैं लेकिन दंगों का रंग सांप्रदायिक ही रहता है।
यही एक बार फिर इस बार पश्चिम बंगाल और बिहार में हुआ, रामनवमी के बाद से पश्चिम बंगाल और बिहार में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी किसी भी किस्म की हिंसा अराजकता चिंताजनक होती है लेकिन जब इस में सांप्रदायिक तनाव मिल जाता है तो हालात और घातक हो जाते हैं ।
रामनवमी में हत्यारो के साथ जुलूस निकालना उसके बाद से हिंसा का भड़कना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
भारत में सदियों से धार्मिक जुलूस निकाले जाते है फीर चाहे वो  दुर्गा पूजा हो रामनवमी हो हनुमान जयंती हो या मोहर्रम हो या चाहे वो बारह वफात का जुलूस हो
तब किसी किस्म की हिंसा नहीं होती थी ,होली और ईद में भी सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहता था फिर अब इधर क्यों ऐसे अवसरों पर हिंसा जन्म  ले लेती है क्या धार्मिक सौहार्द इतना विकृत हो गया है कि अब एक दूसरे को भड़काने का काम किया जाने लगा है?
तलवार लेकर जूलुस निकालने का क्या मतलब है ?
ठीक है कि धर्म के प्रति आस्था होनी चाहिए लेकिन ऐसा करके जिससे दंगा भड़काने की नौबत हो उस की क्या जरूरत अगर ऐसे जुलूसों से  दंगा भड़क जाता है तो उसे पूर्व नियोजित नहीं माना जाएगा ?
दंगा भड़कता है ,आग लगाई जाती है ,दुकाने जला दी जाती है वाहन फूंक  दिए जाते हैं,कुछ लोग मारे जाते हैं कुछ लोग घायल हो जाते हैं क्या यही है धार्मिक जुलूस का फ़लसफ़ा ?
यह तो नहीं ही माना जा सकता कि धार्मिक लोग अपने घर की पूजा पाठ को छोड़कर सड़कों पर  जुलूस के रुप में धर्म मनाने आ जाएं ।
यह कहीं ना कहीं राजनीति साजिश को कारण माना जा सकता है सबसे बड़ा सवाल है कि ऐसे संवेदनशील स्थानों पर प्रशासन जूलुस निकालने की अनुमति कैसे देता है ।
केन्द्र व राज्य सरकारे को राजनीति से इतर रहकर इस दिशा में विचार करने और सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि भविष्य में धार्मिक जुलूसों को अच्छी तरह पड़ताल करके ही अनुमति दी जाए।
ताकी दंगे न भड़के
अजवद क़ासमी की रिपोर्ट 
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