नई दिल्ली। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को ‘साहब’ कहकर संबोधित करने वाले दिल्ली पुलिस के एक पुराने वीडियो के दोबारा वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस वीडियो को साझा करते हुए दिल्ली पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस गैंगस्टरों के लिए इतना सम्मान दिखाती है, तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ भी ऐसा व्यवहार क्यों नहीं किया जाता?
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत अगस्त 2025 के उस वीडियो से हुई, जिसमें पूर्वी दिल्ली के तत्कालीन डीसीपी अभिषेक धनिया एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेते हुए उसे ‘साहब’ कहते सुनाई दिए थे। उस समय पुलिस अधिकारी ने इसे अनजाने में हुई जुबानी चूक बताया था। उन्होंने कहा था कि हाल ही में अपने पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ओमबीर बिश्नोई से मुलाकात के कारण उनके मुंह से ऐसा निकल गया।
अभिजीत दिपके ने क्या कहा?
19 अक्टूबर 2026 को अभिजीत दिपके ने यह पुराना वीडियो दोबारा साझा किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि गैंगस्टरों के प्रति दिखाई जाने वाली शिष्टता का कम से कम कुछ हिस्सा उन छात्रों और कार्यकर्ताओं के लिए भी होना चाहिए, जो शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करते हैं।
दिपके ने पुलिस की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद पुलिस के व्यवहार और नागरिकों के साथ उसके रवैये को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
पुराने वीडियो की अब क्यों हो रही चर्चा?
मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना के बाद यह वीडियो फिर चर्चा में आया। घटना के संबंध में सोशल मीडिया पर एक संदेश सामने आया, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों के नाम पर जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। हालांकि, संदेश की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है और इसे स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता। इसी घटनाक्रम के बीच दिपके ने पुराने वीडियो के जरिए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
पुलिस की छवि और जवाबदेही पर बहस
इस मामले में दो पहलू चर्चा में हैं। पहला, किसी पुलिस अधिकारी द्वारा अपराधी के लिए सम्मानसूचक शब्द के इस्तेमाल से जनता के बीच क्या संदेश जाता है। दूसरा, पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और गंभीर अपराधों में आरोपित लोगों के साथ किस तरह व्यवहार करती है।
हालांकि, केवल एक शब्द के इस्तेमाल से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पुलिस किसी गैंगस्टर का सम्मान करती है या उससे डरती है। अधिकारी ने पहले इसे जुबानी चूक बताया था। ऐसे में पूरे मामले को समझने के लिए बयान के संदर्भ और पुलिस के वास्तविक आचरण को देखना जरूरी है।





