यातायात पुलिस ने शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ ‘आपरेशन मीट एंड ग्रीट’ अभियान चलाया। इस दौरान 2,654 वाहन चालकों पर 2.65 करोड़ रुपये से अधिक का अर्थदंड लगाया गया।
लखनऊ। यातायात पुलिस ने राज्य में शरीब पीकर वाहन न चलाने को लेकर नागरिकों को जागरूक करने के लिए ‘आपरेशन मीट एंड ग्रीट’ अभियान शुरू किया है।
इस अभियान के तहत यातायात निदेशालय द्वारा पिछली नौ व 10 मई को राज्य के 135 टोल प्लाजा पर नाके लगाकर वाहन चालकों की जांच की गई। इस दौरान 69,683 वाहनों की जांच की गई तथा शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में 2,654 वाहन चालकों पर 2.65 करोड़ रुपये से अधिक का अर्थदंड लगाया गया और चालान किए गए।
एडीजी यातायात एवं सड़क सुरक्षा ए सतीश गणेश ने बताया कि डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर यातायात निदेशालय द्वारा राज्य में शराब पीकर वाहन न चलाने को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि अभियान चलाने से पहले वर्ष 2023-24 और 2025 में हुई सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों की समीक्षा की गई। इससे यह पता चला कि अवकाश वाले दिन शनिवार व रविवार को हुए सड़क हादसों में शराब पीकर वाहन चलाने वालों की संख्या आम दिनों की तुलना में ज्यादा थी।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान टोल प्लाजा पर प्रत्येक लेन के लिए समर्पित जांच टीमें नियुक्त की गईं। इन टीमों को टार्च, रिफ्लेक्टिव जैकेट, बाडी वार्न कैमरा, लाउड हेलर एवं ब्रेथ एनालाइजर उपलब्ध कराए गए। अभियान में शामिल महिला पुलिसकर्मियों द्वारा परिवार के साथ यात्रा कर रही महिलाओं से कुशलक्षेम पूछा गया।
साथ ही निर्माण सामग्री ढोने वाले डंपर व ट्रकों की हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट का मौके पर ही सत्यापन किया गया। इस अभियान में यातायात, नागरिक पुलिस व होमगार्ड के कुल 3,645 अधिकारी व कर्मचारियों को तैनात किया गया था।
रक्त में अल्कोहल की मात्रा 30 एमजी से अधिक न हो
मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के अन्तर्गत शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में रक्त में अल्कोहल की मात्रा 30 एमजी प्रति 100 एमएल से अधिक होने पर वाहन चलाना दंडनीय अपराध है।
पहली बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड अथवा छह माह का कारावास का प्रविधान है। वहीं दोबारा पकड़े जाने पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड, दो वर्ष का कारावास अथवा दोनों का प्रविधान है।





