HomeLucknowयूपी की सियासत में नए समीकरणों की आहट

यूपी की सियासत में नए समीकरणों की आहट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आगामी चुनाव में गठबंधन को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के विकल्प के लिए तैयार है। ओवैसी इससे पहले समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की संभावना का संकेत दे चुके हैं।

ओवैसी का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के बीच चुनावी तालमेल और सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच भी सीटों को लेकर बातचीत का दौर जारी है। ऐसे में एआईएमआईएम के गठबंधन प्रस्ताव ने चुनावी समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

चंद्रशेखर आजाद के साथ भी दिखी नजदीकी

ओवैसी और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के बीच राजनीतिक नजदीकी की चर्चा भी पुरानी है। दोनों नेता 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एक तीसरे मोर्चे में साथ आए थे। उस गठबंधन में एआईएमआईएम और आजाद समाज पार्टी के अलावा स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी भी शामिल थी।

उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव को देखते हुए चंद्रशेखर आजाद की सक्रियता भी बढ़ी हुई है। ऐसे में ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव और दोनों नेताओं के बीच पहले बने राजनीतिक तालमेल को लेकर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के लिए किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा अभी सामने नहीं आई है।

सपा और बसपा के लिए क्या मायने?

ओवैसी की ओर से गठबंधन का प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब समाजवादी पार्टी अपने मौजूदा गठबंधन सहयोगियों के साथ चुनावी रणनीति पर काम कर रही है। अखिलेश यादव ने भी हाल में गठबंधन को लेकर अपनी प्राथमिकताओं के संकेत दिए हैं।

दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी भी उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में एआईएमआईएम और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं की सक्रियता को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि 2027 में विपक्षी राजनीति कितने अलग-अलग खेमों में बंटेगी और किन दलों के बीच चुनाव पूर्व तालमेल बनता है।

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ओवैसी ने गठबंधन के दरवाजे खुले होने की बात कही है, लेकिन अंतिम समझौता किन दलों के बीच होगा और सीटों का क्या फार्मूला बनेगा, यह आने वाले दिनों की राजनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगा।

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